द्वैधीभाव!
द्वैधीभाव Dual nature as a virtue of king. राजा का एक गुण शत्रुओं में यथावश्यक संधि और विग्रह करा देना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वैधीभाव Dual nature as a virtue of king. राजा का एक गुण शत्रुओं में यथावश्यक संधि और विग्रह करा देना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बद्ध- बंधा हुआ, माहनीय कर्म से आवृत जीव को बद्ध कहते है। Baddha- Embodied, Restricted, Bounded
द्वींद्रिय जाति नामकर्म A Karmic nature causing birth in the form of two sensed beings. वह कर्म प्रकृति जिसमें द्वींद्रिय जाति प्राप्त हो जैसे- शंख, सीप इत्यादि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रस्तार शय्या- शयन करने के षिलापê आदि। Prastara Sayya- Stone bed
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रश्नभाशा- भाशा का एक भेद; प्रष्न पूछना। Prasnabhasa- language of questioning, Interrogation
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बदला- उपकार या उपकार करने वाले के प्रति की जाने वाली प्रतिक्रिया। Badala- revenge of returning of a favour
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्वेषण मंत्र – Vidvesana Mantra. Mystical verses for the use of causing mutual contradiction. वशीकरण, मारण, उच्चाटन आदि मन्त्रों में से परस्पर में विद्वेष कराने वाला एक मंत्र “
चेर A country in middle Arya Khand (region), Past name of Kerala state. मध्य आर्यखण्ड का एक देश , केरल का प्राचीन नाम [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधावली- कर्म बंध होने के बाद आवली मात्र का-उदय, उदीरणादि रुप न होना, यही आवलीकाल बंधावली हैं इसे आवाधावली- अचलावली भी कहते है। Bandhavali- non fruitional period of karmas after their binding
द्वितीयावली A specified time period (related to Avali). उदयावली से ऊपर के आवली प्रमाण काल को द्वितीयावली या प्रत्यावली कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]