चतुरस्त्र!
चतुरस्त्र Quadrilateral. चर्तुभुज अर्थात् चार भुजाओं वाला ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चैत्यवंदना Reverential visits of temples with self-involvement. आत्माधीन होजकर जिनबिम्ब आदिकों की वंदना करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्यानगृद्वि कर्म प्रकृति – Styangraddhi Karma Prakrti. A karmic nature causing power of committing abnormal activity in the state of somnambulism.दर्शनावरण कर्म की उत्तर प्रकृतियो मे एक प्रकृति, जिसके निमित्त से स्वप्न अवस्था मे विशेष श़िक्त प्रकट होती है और जीव सोता हुआ भी भयानक असाधारण कार्य करता है उसे स्तयानगृद्वि निद्र कहते है।
त्रैविद्यदेव Title for some Acharyas in Nandi sangh (group) etc. कतिपय आचार्यों की उपाधि जैसे नन्दि संघ के देशीयगण की गुर्वावली के अनुसार पाँच आचार्यों की उपाधि, कातंत्र रूपमाला व्याकरण के भावसेन – त्रैविद्य टीकाकार आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चकवा A large orange-brown duck, the Sheldrake, the significant symbol of Lord Sumatinath. सुमतिनाथ भगवान का चिन्ह।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रामपुत्र – भगवान महावीर के तीर्थ में हंुए 10 अन्तकृत कंेवलियों में चैथंे केचली। Ramaputra-Name of an omniscient of the assembly of lord Mahavira
चारू Elegant, Graceful, A king of Kuru dynasty. प्रिय , शानदार , कुरुवंश का एक राजा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चेतनपुद्गल धमाल A book written by Buchiraj in 1532. बूजिराज द्वारा ई.सन् १५३२ में अर्चित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुरावश्यक Four super necessities of the 7th stage of spiritual development. अनंतगुणी विशुद्धि , अप्रशास्ता प्रकृतियों की अनंतगुणी हानि, प्रशस्त प्रकृतियों में अनंतगुणी वृद्धि , स्थिति बंधापसरन ये ४ आवश्यक कार्य अधःप्रवृत्तकरण संयत अर्थात् सप्तम गुणस्थानवर्ती मुनि के होते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]