ऋजुसूत्रनय!
ऋजुसूत्रनय Straight view point (related to present). जो नय केवल वर्तमान काल संबंधी पर्याय को ग्रहण करता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋजुसूत्रनय Straight view point (related to present). जो नय केवल वर्तमान काल संबंधी पर्याय को ग्रहण करता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रसज – दूध आदि रसों में उत्पन्न होते वाले या वीर्य में उत्पन्न होने वाले जीव।जो सेमूच्छन जन्म वाले होते है और नेत्रों से नहीं दिखते है। Rasaja-Invisible micro beings of take birth in liquids
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगदर्षन – एक दर्षन जो ध्यान धारणा समाधि आदि के द्वारा तत्वों का साक्षात् करने ंका उपाय सुझाता है। Yogadarsana-name of a philosophy
एकजीव The being (reg. soul), A type of disquisition door (Anuyogdvar). अनुयोगद्वार का एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमावधि : Supreme clairvoyance.अवधिज्ञान के 3 भेदों में एक भेद, यह उसी भव से मोक्ष जाने वाले (चरमषरीरी) साधु को होता है, केवल ज्ञान होने तक यह नही छूटता ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधना – Saadhanaa. Study (of soul), Striving towqrds any end or accomplishment. लौकिक एवं आध्यात्मिक सिद्धि के लिए किया गया प्रयत्न ।
ऋजुकायकृतार्थज्ञ One having knowledge of telepathy i.e. Manah Paryay Gyan (related to bodily activities). काय के द्वारा किये जाने वाले कार्य को ऋजुमति मनः पर्यय ज्ञान के द्वारा जानने वाला।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राश्ट्रकूटवंष – जंगतंुग अमोधवर्श आदि राजाओ का वंष। इस वंष का राज्य मालवा प्रदेष में था। राजधानी मान्यखेट थी। Rastrakutavamsa-Name of a dynasty
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सातिशय अप्रमत्त – Saatisaya Apramatta. Saints rising on the 2nd substage of the 7th stage of spiritual development. अप्रमत्त संयत के दो भेदो मे एक भेद। जो साधु उपशम या क्षपक श्रेणी चढ़ने के सम्मुख है वे सातिशय अप्रमत्त संयत कहलाते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नत्रयव्रत – वर्श में 3 बार, भादो, माध चैत्र में विघिपूर्वक षु, 13 से पूर्णिमा तक किया जाने वाला व्रत। Ratnatrayavrata- A particular type of vow or fasting