विनयकर्म!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनयकर्म – Vinayakarma. Serving activity, to attend on, to look after. एक कृतिकर्म; सूश्रूषा करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनयकर्म – Vinayakarma. Serving activity, to attend on, to look after. एक कृतिकर्म; सूश्रूषा करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विवेचन – Vivechana. Thorough investigation, Meaningful description or exposition of treatise. कथन, व्याख्यान, वर्णन, शास्त्रों के कथन करने की पध्दति का कथन करना “
खंड Part, Division, fragment, chapter, Section. भाग, हिस्सा, शास्त्र आदि का भाग, मकान का हिस्सा आदि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिकाल वंदना Act of paying reverence three times a day. पूर्वाह्न, मध्याह्न, व अपराह्न , में की जाने वाली सामायिक। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विश्वभूषण – Vishvabhushana. Name of a Digambar saint, the composer of ‘Bhaktamar charit’ & ‘lndradhvaj Vidhan’ in Sanskrit. भक्तामर चरित एवं संस्क्रत इंद्रध्वज विधान के रचियता एक दिगम्बर साधु “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनिभद्र–Munibhadra. Name of a Acharya. एक आचार्य (ई. सन1350–1390) जिनके शिष्य ने पर्मात्मप्रकाश ग्रंथ पर कन्नड़ टीका लिखी है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाथधर्म कथा – Nathadharma Katha The 6th part of Dvadshang (scriptural knowledge)- a supreme tale containing conversation related to Lord etc. ज्ञातधर्म कथा; द्वादशांग का छठा अंग जिसमे गणधर देवकृत प्रश्नों के उत्तर व तीर्थंकर; गणधर आदि संबंधी धर्म कथा का वर्णन होता है ” इसके 5 लाख 56 हजार मध्यम पद है ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावना पच्चीसी व्रत – Bhavana Pachchisi Vrata. A specific type of vow (fasting), to be observed for 25 days. एक व्रत जिसमें विधिपूर्वक २५ उपवास किये जाते हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धैर्यवान : == विसयजलं मोहकलं, विलास बिव्वो अजलयराइन्नं। मयमयरं उत्तिन्ना, तारुण्ण महन्नवं धीरा।। —इन्द्रियपराजयशतक : ४३ जिसमें विषयरूपी जल है, मोह की गर्जना है, स्त्रियों की विलासभरी चेष्टा रूप मत्स्य आदि जलचर जीव हैं और मद रूपी जिसमें मगरमच्छ रहते हैं ऐसे तारुण्य रूपी समुद्र को धीर पुरुषों…
आचारसार A book written by ‘Acharya’ Veernandi . आचार्य वीरनंदि (वि.सं. 556)कृत मुनि आचरण ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]