दक्षिणाग्नि!
दक्षिणाग्नि A sacred fire of square fire-pit. चैकोर कुंड की अग्नि । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दक्षिणाग्नि A sacred fire of square fire-pit. चैकोर कुंड की अग्नि । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संप्रदान कारक – Sanpradaana Kaaraka. The dative case in grammar. षट्कारकों में चतुर्थ कारक; कर्म जिसे देने में आवे अर्थात् जिसके लिए करने में आवे ” (के लिए, के अर्थ, के वास्ते) “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == निरभिमान : == जो ण य कुव्वदि गव्वं, पुत्तकलत्ताइसव्वअत्थेसु। उवसमभावे भवदि, अप्पाणं मुणदि तिणमेत्तं।। —कार्तिकेयानुप्रेक्षा : ३१३ जो पुत्र—कलत्रादि किसी का भी गर्व नहीं करता और अपने को तृण के समान मानता है, उसे उपशम—भाव होता है। रिद्धीसु होह पणंवा जइ इच्छह अत्तणो लच्छी। —कुवलयमाला : ८५ यदि…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ललितांग देव – सल्लेखना के प्रभाव से उत्पन्न एषान स्वर्ग का देव। ये ऋशभदेव भगवान के पूर्व का 9 वा भव है। Lalitamga Deva-Name of a heavenly deity, The pre birth soul of Lord Rishabdev
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रद्धा – Shraddhaa. Faith, Reverence, Reverential belief. दृष्टि, श्रद्धा, आस्था, रूचि और प्रत्यय ये पर्यायवाची नाम हैं ” दाता के सात गुणों में एक गुण, पात्र के प्रति आदर भाव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिंगशुद्धि – कर्मो को निर्मूल करना एवं जिनदेव कथित धर्म पर परमार्थभूत भक्ति प्रेम रखना।ऐसा करने वाले मुनियो में लिग शुद्धि होती है। Limgasuddhi-Absolute purity of the mind of a saint
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यदु–Yadu. Name of a king of Hari dynasty who established Yadu dynasty. यदु (यादव) वंश का संस्थापक हरिदंशी एक राजा”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवेश- भेदन, भीतर जाना, पहुंच। Pravesa- penetration, entrance
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसारी – Sansaaree. Wordly beings. आठों कर्मों से लिप्त जीव अर्थात् जिन्होंने स्वभाव को प्राप्त नही किया है “
चंद्रसेन Spiritual teacher of Aryanandi ji. आर्यनंदि के गुरु (ई. ७४२-७७३)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]