तुरीय चारित्र!
तुरीय चारित्र A super conduct, to be observed in the 10th stage of spiritual development (Gunsthan). चैथा सूक्ष्मसाम्पराय चारित्र , यह 10 वें गुणस्थान में होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तुरीय चारित्र A super conduct, to be observed in the 10th stage of spiritual development (Gunsthan). चैथा सूक्ष्मसाम्पराय चारित्र , यह 10 वें गुणस्थान में होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चेतना Consciousness, Vigour, Vitality. जिस शक्ति के सानिध्य से आत्मा ज्ञाता- दृष्टा अथवा कर्ता – भोक्ता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चिदम्बर An addressing word for one at the supreme spiritual state. चैतन्य ही है अम्बर अर्थात् वस्त्र जिनका , ऐसी अर्हन्त – सिद्ध आत्मा को चिदम्बर शब्द से संबोधित किया है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
घ्राण Nose-a smelling sense. नासिका ; ५ इन्द्रियों में तीसरी इन्द्रिय ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्यानगृद्वि – Styanagraddhi. To commit abnormal activity in the state of somnambulism (walking habit in the sleeping state).5 निद्रांओ मे एक निन्द्रा, स्वप्न मे उठकर व्यक्ति कोई भयानक असाधारण कार्य करके पुनः सो जाये।
दासत्व Servitude; being in the service of God. सेवकपने की भावना सम्यग्दृष्टि का वात्सल्य गुण सिद्ध प्रतिमा, जिनबिम्ब, जिनमन्दिर, चार प्रकार के संघ में और शास्त्रों में वात्सल्य भाव भी दासत्व कहलाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चलबिम्ब प्रतिष्ठा Installation ceremony of small idols. एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकने वाली प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधिगुप्त – Samaadhigupta. The predestined 18th Tirthankar (Jaina-Lord). भाविकालीन 18 वें तीर्थकर है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यक्षवर(सागर द्वीप)– Yakshvar (Saagar Dvip). Name of a island and ocean of middle universe. मध्यलोक के अंतिम सौलह द्वीपों में तेरेहवा द्वीप व समुंद्र”