षट्चत्वारिंशत!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्चत्वारिंशत – Satcatvaarinshata. Forty six (46 virtues of Lord Arihant etc.) 46 (अर्हंत भगवान के 46 गुण, आहार के 46 दोष, वसतिका सम्बंधी 46 दोष आदि )
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्चत्वारिंशत – Satcatvaarinshata. Forty six (46 virtues of Lord Arihant etc.) 46 (अर्हंत भगवान के 46 गुण, आहार के 46 दोष, वसतिका सम्बंधी 46 दोष आदि )
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधन बद्धत्व- अनादिकाल से जीव का कर्म वंधन से बद्ध होना। Bandhana Baddhatva- binding of soul with karmas.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभवचरिउ – Sambhavachariu. Name of a treatise written by poet Tejapal. कवि तेजपाल द्वारा (ई. 1443) रचित यथनाम विषयक अपभ्रंश ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्लेष संबंध – Shlesa Sambandha. Close relation (togetherness). संश्लेष संबंध, परस्पर संबंध को प्राप्त होना, जैसे काष्ठ और लाख का संबंध, दूध और जल का संबंध “
इंद्रिय व्याधि Diseases, Internal deterioration. इन्द्रिय बीमारी इन्द्रिय विषयों में आसक्ति हर्ष विषाद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतावतार (ग्रंथ) – Shrutaavtaara (Grantha). Name of two different treatises written by Acharya Indranandi & by Acharya Shreedhar. आचार्य इंद्रनंदि (ई.श. 10 -11) द्वारा रचित प्राकृत गाथाबद्ध भगवान महावीर के निर्वाण से 683 वर्ष पर्यंत की मूलसंघ की पट्टावली, आचार्य श्रीधर (ई.श. 14) द्वारा रचित प्राकृतछंदबद्ध ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्तापिधान – Sachittaapidhaana. Covering food with leaf etc. (objects having life), an infraction of vow of hospitality. सचित्त वस्तुओं अर्थात् पत्ते आदि से आहार ढांकना, अतिथि-संविभाग व्रत का एक अतिचार “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतज्ञानावरण – Shrutgyaanaavarana. Karmas obscuring the Shrutgyaana (scriptual knowledge). ज्ञानावरण कर्म का एक भेद; जो कर्म श्रुतज्ञान को आवरण करे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्त संबंध आहार – Sachitta Sambandha Aahaara. Taking food mixed with other food articles having life. भोगोपभोगपरिमाण व्रत का एक अतिचार; सचित्त वस्तुओं से सम्बन्ध रखने वाले आहारपान का सेवन करना “
आनुपूर्वी Regular order. अनुलोम क्रम। इनके तीन भेद हैं- पूर्वानुपूर्वी (अनुलोम क्रम), पश्चादानुपूर्वी (प्रतिलोम क्रम), यथातथानुपूर्वी (यथा-तथा क्रम)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]