पुरुषत्त्व!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषत्त्व – Purusattva. Man hood, Manliness, Virility. पुरुषता- पुरुषपने के समस्त गुणों से युक्त “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषत्त्व – Purusattva. Man hood, Manliness, Virility. पुरुषता- पुरुषपने के समस्त गुणों से युक्त “
तेजोजराशि A mathematical quantity, A chief disciple of Lord Rishabhdev. जिस राशि को चार से अवहृत (भाग) करने पर शेष तीन अंक रहते हैं, भगवान ऋषभदेव का 62 वां गणधर (तेजोराशि)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराणसंग्रह – Puranasamgraha. Name of books pertaining to the life history of Jaina-Lords. आचार्य दामनन्दि, श्रीचन्द्र आदि आचार्यों द्वारा २४ तीर्थंकरों के जीवन चरित्र के आधार पर रचित इस नाम के कई ग्रंथ हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्ञाभाव छेदना – Pragyaabhaava Chhedanaa. Sagacious knowledge related to 6 entries (dravyas). मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनःपर्ययज्ञान और केवलज्ञान के द्वारा छह द्रव्यों का ज्ञान होना “
तैजस शरीर बंध A kind of bond of lustrous molecules (reg. body). 5 प्रकार के बंधन नामकर्म के भेदों में एक भेद, गृहीत तैजस पुद्गल स्ंकधों का परस्पर मिल जाना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दर्शन कथा A sacred legend . सति मनोवती नामक एक कन्या द्वारा गजमोती चढ़ाकर जितेन्द्र भगवान के दर्शन करने की एक प्राचीन रोमांचक कथा जिस पर गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ‘प्रतिज्ञा’ नामक धार्मिक उपन्यास लिखा है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मोह-विजय : == णिस्सेसखीणमोहा, फलिहामलभायणुदयसमचित्तो। —पंचसंग्रह : १-१५ जिसने सम्पूर्ण मोह को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, उस निर्मोही का चित्त स्फटिक मणि के पात्र में रखे हुए स्वच्छ जल की भाँति निर्मल हो जाता है।
त्रसकाय Mobile beings (two sensed to five sensed beings). स्थावर जीवों को छोडकर दो इन्द्रियों से पंचेन्द्रिय तक के जीव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदकल्पना – सापेक्ष – अशुद्ध – द्रव्यार्थिक नय –A kind of viewpoint which differentiate the relation of properties (virtues) and its possessor (matter). नय; जो द्रव्य में गुण-गुणी का भेदकर के उनमेंसम्बधं स्थापित करता है, जैसे द्रव्य गुण व पर्याय वाला है अथवा जीव ज्ञानवान्है “