द्रव्य अधिकरण!
द्रव्य अधिकरण Physical stratum. द्रव्य का आधार।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दोहापाहुड़ A treatise written by Acharya Yogendudeva. आचार्य योगेन्दु देव (ई.श.6 उत्तरार्ध) कृत एक ग्रंथ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसारानुप्रेक्षा – Sansaaraanuprekshaa. Contemplation about the wordly troubles. 12 भावनाओं में एक भावना; संसार के स्वभाव एवं संसार परिभ्रमण का अर्थात् दुःखमय स्वरुप का चिंतन करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवनालय – Bhavanalaya. Residence of deities. भवनवासी देवों के भवन “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धनासक्ति : == धन धरती में गाडै बौरा, धूरि आप मुख लावे। मूषक साँप होइगो आखर, तातै अलठि कहावै।। —आनन्दघन ग्रंथावली : पद—४ मूढ़ मानव अपने धन का संरक्षण करने हेतु धन को जमीन में गाड़ता है और उस पर धूल डालता है किन्तु वस्तुत: वह धन के…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृहतपल्य व्रत –VrhatapalyaVrata. A particular kind of vow to be observed with particular procedure. प्रत्येक माह मे ये कई व्रत आते हैं, यह एक वर्ष तक किया जाता है ” एक वर्ष मे इसके ७२ व्रत होते हैं ” इसमे एक – एक उपवास का पल्य – पल्य उपवास बराबर फल होता…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परस्थान संक्रमण:Particular transition to other place (reg. other sangrah Krishti).संक्रमण का एक भेद । दूसरी अन्य संग्रह कृष्टियों में या पर रूप परिणमन करना ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावविशुध्दी – Bhavavisuddhi. Volitional purity. प्रत्याख्यान; राग द्वेष आदि अशुभ परिणाम का त्याग करना “
त्रिज्ञानसिद्ध A type of salvated beings (possessing three basic knowledges). भूतप्रज्ञापननय की अपेक्षा से तीन ज्ञान से सिद्ध होने वाले जीव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चतुर्गति Four body forms or destinities; Hell, Animals and Plants, Human beings and Deities. चार गतियाँ ; नरक , तिर्यंच , मनुष्य व देवगति ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]