प्लुत!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्लुत – तीन मात्र वाले ३ मोंत्रस नि कहलाते है. Pluta- Word with 3 Matras (intra- syllabic vowel symbols)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्लुत – तीन मात्र वाले ३ मोंत्रस नि कहलाते है. Pluta- Word with 3 Matras (intra- syllabic vowel symbols)
इंद्रध्वज A type of worshipping to be performed by Indras. पूजा के पाँच (नित्यमह आष्टान्हिक इन्द्रध्वज कल्पद्रुम सर्वतोभद्र) भेदों में से एक भेद जो इन्द्रों द्वारा मध्यलोक के 458 मंदिरों पर ध्वजा चढ़ाकर की जाती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रोक्षण विधी- प्रतिमा की प्रतिश्ठा के समय की जाने वाली एक विधि; पंचकल्याणक प्रतिश्ठा में सौभाग्यवती सित्रयों द्वारा आकार षुद्धि की क्रिया में भगवान की प्रतिमा में मंत्रपूर्वक जो चंदन लेपन कराया जाता है, उसका नाम प्रोक्षण विधी है, इसक सम्प्रोक्षण विधि भी कहते है। Praksana Vidhi- A prescribed ritual procedure for the installation…
उत्तर वैक्रियक Transformable protean body (variant). मूल शरीर को छोड़कर पृथक् विक्रिया से बने शरीर।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संकलन श्रेणी व्यवहार – Sankalana Shreni Vyavahaara. Integral series of numbers. गणित विषयक एक संकलन व्यवहार की श्रेणी = 4+8+12+16+20+24+28+32=144 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षोडशकारण भावना व्रत – Sodashakaarana Bhaavanaa Vrata. A particular & procedural vow (fasting). उत्कृष्ट 16 वर्ष, मध्यम 5 वर्ष, जघन्य 1 वर्ष तक प्रतिवर्ष भाद्रपद, माघ, व चैत्र इन 3 महीनों में कृ. 1 से लेकर अगले महीने की कृ. 1 तक 32 दिन तक 16 उपवास, 16 पारणा करना एवं “दर्शनविशुद्धयादि षोडशकारणेभ्यो नमः”…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध विधान- प्रकृति, स्थिति, अनुभाग और प्रदेश के भेद से भेद को प्राप्त हुए बन्ध के भेदों को बंध विधान कहते है। Bandha Vidhana- Constitution of Karmic binding
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड्दिक् गति – Saddika Gati. Six directional motion of beings, binded with Karmas. कर्मबद्ध जीवों का कर्मनिमित्तक षट्दिक अर्थात 6 दिशाओं में गमन होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रासुक- जिसमे से एकेनिद्रय स्थावर जीव निकल गये हैं वह प्रासुक द्रव्य कहलाता है। Prasuka- Sterilized, boiled water, milk etc.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्खंडागम – Satkhandaagama. Six parts of great Jaina philosophical literature containing Karmic theory. कर्म सिद्धांत विषयक ग्रंथ; इसकी उत्पत्ति मूल द्वादशांग श्रुतस्कंध से हुई है ” इसके 6 खंड हैं (देखे- षट्खंड टीका) ” पहले खण्ड के सूत्र पुष्पदंत आचार्य (ई. 106-136) के बनाये हुए हैं, उनका शरीरान्तहो जाने के कारण शेष 4 खण्डों…