पंचांग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचांग – Panchaanga. Five body organs, to bow down with bending both hands, knees & head, a method of paying reverential greetings. पाँच अंग–दोनों हाथ, दोनों घुटने व मस्तक को झुकाकर नमस्कार करना पंचांग नमस्कार कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचांग – Panchaanga. Five body organs, to bow down with bending both hands, knees & head, a method of paying reverential greetings. पाँच अंग–दोनों हाथ, दोनों घुटने व मस्तक को झुकाकर नमस्कार करना पंचांग नमस्कार कहलाता है “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्य गणधर– Mukhya Gandhar. Head of the chief of disciples of Lord. तीर्थंकर के प्रधान शिष्य, जो दिव्यध्वनी का सार दवादवाशांगश्रुत के रूप में जगत को प्रदान कटे है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचना – Vaachanaa.: Studying, reading & explaining of religious books. स्वाध्याय के 5 भेदों में एक भेद ;निर्दोष ग्रन्थ पढना ,सुनना या योग्य पात्र को सुनाना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति बंध – Prakrti Bandha. Regular binding of different types of karmic natures. राग, द्वेषादि के निमित्त से जीव के साथ ज्ञानावरणादि कर्मों का निरंतर बंध होना अर्थात् जीव के भावों की विचित्रता के अनुसार विभन्न प्रकार की फलदान शक्ति वाले कर्मों का बंध होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाक्यप्रतिक्रमण – Vaakyapratikramana.: A kind of repentance (pronouncing for the committed faults). किए हुए अतिचारों एवं सूत्रों का उच्चारण करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचवर्ण – Panchavarna. Name of a planet, five kinds of colours. एक ग्रह का नाम, पांच रंग-लाल, हरा, नीला, पीला, काला “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा गुरू :Acharyas of Moolsangh in the tradition of Gautam Swami. गौतम स्वामी की परम्परा में मूलसंघ के आचार्यगण ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य कक्ष – Bahya Kaksa. Exterior cells. आंगन , बरामदा आदि “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेदक सम्यक्त्व –VedakaSamyaktva Destructive subsidential right belief क्षयोपशम सम्यग्दर्शन ” दर्शन मोहनीय कर्म की सम्यक्त्व प्रकृति के उदय से जो तत्वाथ श्रध्दान होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचभाव – Panchabhaava. Five kinds of emotions (attitudes caused by different Karmicoperations) related to Jaina philosophy. जीव के पाँच निज तत्व; औपशमिक, क्षायिक, क्षायोपशमिक (मिश्र), औदयिक, पारिरणामिक भाव “