त्रिलोकबिंदुसार!
त्रिलोकबिंदुसार Name of 14th Purva (parts of scriptural knowledge). चैदहवां पूर्व । इसमें तीन लोक का स्वरूप , एवं बीजगणित आदि का कथन है इसके साढे 12 करोड़ पद है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिलोकबिंदुसार Name of 14th Purva (parts of scriptural knowledge). चैदहवां पूर्व । इसमें तीन लोक का स्वरूप , एवं बीजगणित आदि का कथन है इसके साढे 12 करोड़ पद है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमेष्ठीसहाय :A book written by a Hindi poet.ई0 श0 19 के मध्यपाद में एक हिन्दी कवि कृत ग्रंथ”
एकान्त वृद्धि योगस्थान See – Ekå´tånuvro ddhi Yogasthåna. देखें – एकांतानुवृद्धि योगस्थान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
देहत्रय Three kinds of body. औदारिक , तैजस , कार्मण ये तीन शरीर।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधारण वनस्पति – Saadhaarana Vanaspati. General vegetation. वनस्पति के दो भेदों में एक भेद । जिस वनस्पति के आश्रित साधारण जीव होते है वह साधारण कहलाती है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमार्थ:Highest truth or merit, Release from rebirth, ultimate or transcendental reality.उत्कृष्ट अर्थ, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, लक्षण वाले परमार्थो में जो परम उत्कृष्ट है, ऐसा मोक्ष लक्षण वाला अर्थ परमार्थ कहलाता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयमभाव – Sanyamabhaava. Restraintful temperament. उपशम भाव से धारण किये गये व्रतादि संयम भाव को प्राप्त हो जाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सादि बंध – Saadi Bandha. Rebinding of karmas. जिस कर्म प्रकृति के बन्ध का अभाव होकर पुनः बन्ध होता है वह सादिबन्धी प्रकृति कहलाती है।
चातुर्दीपिक भूगोल The name of an ancient composition of geography. एक भूगोल जो रायकृष्णदास जी के लेख के अनुसार वैदिक धर्मं में मान्य सप्तद्वीपिक भूगोल से अधिक प्राचीन है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यज्ञोपवीत–Yagyopavit. Sacred thread (used for sanctifying or purificatory rites). एक संस्कार; चक्रवर्ती भरत ने 11 प्रतिमाओ के विभाग से वृतो के चिन्ह स्वरुप एक से लेकर 11 तार के सूत्र व्रतियो को दिये थे, जनेऊ; रत्नत्रय एवं सात परम स्थानो का सूतक 3 व 7 तारो का सूत्र” सभी पूजन–दान आदि क्रियाओ में…