गुरुवन्दना!
गुरुवन्दना Belief in false preceptor of spiritual teachers. रत्नत्रयधारक यति, आचार्य, उपाध्याय, साधु आदि के उत्कृष्ट गुणों को जानकर श्रद्धा सहित विनय करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुरुवन्दना Belief in false preceptor of spiritual teachers. रत्नत्रयधारक यति, आचार्य, उपाध्याय, साधु आदि के उत्कृष्ट गुणों को जानकर श्रद्धा सहित विनय करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गर्दतोय A division of special heavenly deities (Laukantik). लौकान्तिक देवों का एक भेद ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकाम – Prakama. Name of the 4th pre-destined Rudra. भविष्यत् कालीन चौथे रूद्र का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विप्लुत – Vipluta. Images of moon etc. in water. जिसका तरंगादि में अनेक प्रकार से डूबना या तैरना हो रहा है, ऐसे, जल में पड़े हुए चंन्द्र प्रतिबिम्ब आदि विप्लुत है “
गरूड़ Ruling demigod of Jaina Lord Shantinath, 4th Patal (layer) of sanatkumar heaven, Eagle or a large vulture. शांतिनाथ भगवान का शासन यक्ष. सनत्कुमार स्वर्ग का चौथा पटल. एक विशालकाय पक्षी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संयम : == यथा कूर्म: स्वअंगानि, स्वके देहे समाहरेत्। एवं पापानि मेधावी, अध्यात्मना समाहरेत्।। —समणसुत्त : १३७ जैसे कछुवा अपने अंगों को अपने शरीर में समेट लेता है, वैसे ही मेधावी (ज्ञानी) पुरुष पापों को अध्यात्म के द्वारा समेट लेता है। वय समिदि कसायाणं दंडाणं तह इंदियाण पंचण्हं।…
गंगदेव Name of an Acharya possessing knowledge of 10 purvas & 11 angas. एक आचार्य जिनका नाम ‘देव’ था , भद्रबाहु प्रथम के पश्चात् दसवें, ११ अंग व पूर्वधारी हुए थे । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
आचारांग A part of scriptural knowledge (shrutgyan) containing description about conduct of saints & householdess. जिनवाणी के 12 अंगों में पहला अंग जिसमें मुनि एंव श्रावकों के आचरण का कथन है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयमासंयम – sanyamaasanyama. A type of minor vow related to restraintful & nonrestraintful violence. It is made by peacock feathers which are turhed down naturally while davcing of peacock. अणुव्रत; त्रस हिंसा से विरति तथा स्थावर हिंसा से अविरति “
खलीनित An infraction in the meditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक अतिचार; लगाम से पीड़ित घोड़ेवत् मुख को हिलाते हुए खड़े होना । [[श्रेणी:शब्दकोष]]