आठ शुद्धी!
आठ शुद्धी Eight particular kinds of purity related to mind, speech, body, food etc. मन, वचन की शुद्धि, आहार की शुद्धि, ईर्यापथ शुद्धि, व्युत्सर्ग शुद्धि, शयनासन शुद्धि, और विनयशुद्धि ये 8 शुद्धियाँ हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आठ शुद्धी Eight particular kinds of purity related to mind, speech, body, food etc. मन, वचन की शुद्धि, आहार की शुद्धि, ईर्यापथ शुद्धि, व्युत्सर्ग शुद्धि, शयनासन शुद्धि, और विनयशुद्धि ये 8 शुद्धियाँ हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जगन्नाथ The writer of the book ‘Sukh Nidhan’. ‘सुख निधान’ के रचयिता (ई. १६४२-) ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सशल्य मरण – Sashalya Marana. Death with passionate sting or passionate sting or passionful death. माया, मिथ्या, निदान इनमें से किसी भी शल्य सहित मरना ।
जघन्य युक्तासंख्यात A mathematical term (reg. numbers). जघन्य परितासंख्यात की दो बार वर्गित संवार्गित राशि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वार्थाधिगम Knowledge of ascertained reals or truth. तत्वों के अथ्ज्र्ञ का ज्ञान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जघन्य प्रोषधोपवास A type of fasting (related to Ashtami, Chaturdashi). अष्टमी , चतुदशी को एकासन अथवा आचाम्ल निर्विकृति आहार करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
णमोंकार विधान Name of a Vidhan-procedural worshipping composition. आर्यिका श्री अभयमती माताजी (ई.श.20 उत्तरार्द्ध) एंव अन्य लेखकों द्वारा रचित णमोकार मंत्र के 35 अक्षरों पर आधारित एक पूजा विधान। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूल प्रायश्चित–Mula Prayshchit. A special punishment for a saint –Re-initiation. किसी दोष विशेष से युक्त साधु को पुनः दीक्षा देना मूल प्रायश्चित कहलाता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सविपाक निर्जरा – Savipaaka Nirjaraa. Shedding off or dissociation of Karmas on maturity. निर्जरा के दो भेदों में एक भेद, कर्मो का अपने समय पर उदय में आकर झडना ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विसपर्ण –Visarpana. Expansion, Crawling, Slight expansion of soul-points. फैलाव, प्रसारण, विस्तार, रेंगना, सरकाना, दीपक के प्रकाश के समान जीव के प्रदेशों का संकोच-विस्तार (विसपर्ण) होता है “