प्रीतिंकर!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रीतिंकर- कुरुवंष का एक राजा, ऊध्र्व ग्रैवेयक का विमान। Pritimkara- A king of kuru dynesti A heavenly abode of Urdhva graiveyak
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रीतिंकर- कुरुवंष का एक राजा, ऊध्र्व ग्रैवेयक का विमान। Pritimkara- A king of kuru dynesti A heavenly abode of Urdhva graiveyak
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड् रसी व्रत – Sadrasee Vrata. A particular & procedural vow (fasting) pertaining to renouncement of 6 kinds of particular delicacies. उत्कृष्ट 24 वर्ष, मध्यम 12 वर्ष व जघन्य 1 वर्ष में ज्येष्ठ कृ. 1 से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक कृ. 1 को उपवास, 2-15 तक एकाशन, शु. 1 को उपवास, 2-15 तक एकाशन करना…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधनीय- बन्धयोग्य कर्म और नोकर्म स्कन्ध बन्धनीय कहलाते है। Bandhaniya- karmas causing for binding
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्गुण हानि वृद्धि – Satguna Haani Vriddhi. Finite or infinite increase & decrease in indivisible particles (of 6 kinds). अविभाग प्रतिच्छेदों में हानि वृद्धि का नाम ही षट्गुण हानि वृद्धि है ” ये 6-6 प्रकार की होती है ” (देखे- षड्गुण हानि वृद्धि) “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनोहर- Manohara. Beautiful, alluring, pleasing, A type of peripatetic deities, Name of initiation – forests of Lord Padmaprabh, Shreyansnath and Vasupujya. मनकोमोहितकरनेवाला , महोरगजातिकाएकव्यंतरदेव , एकवनजहाँतीर्थंकरपदमप्रभ, श्रेयांसनाथ , वासुपूज्यनेदीक्षालीथी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ष – Sa. The 31st consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का इकतीसवाँ व्यंजन अक्षर, इसका उच्चारण स्थान मूर्धा है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == केवलज्ञान : == तह य अलोयं सव्वं तं णाणं सव्व—पच्चक्खं।। —कार्तिकेयानुप्रेक्षा : २५४ जो द्रव्य—पर्याय से युक्त संपूर्ण लोक को और संपूर्ण अलोक को (सब कुछ को) प्रकाशित एवं प्रत्यक्ष करता है, वह केवलज्ञान हुआ करता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्लेष – Shlesa. A union, an association, A figure of speech containing two or more meanings of a word. संयोग, मिलन, वह अलंकार जिसमें दो या अनेक अर्थो वाले शब्द हो अथवा वे अनेक अर्थो में प्रयुक्त हुए हो “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयमचरण चारित्र – Sanyamacarana Caritra. Restraintful pure conduct of saints. चारित्र के 4 भेदों में एक भेद, सकल चारित्र ” मुनियों के व्रत को सकल चारित्र कहते है “
ईसान Name of a direction ‘Disha’, Name of a heavenly mode. पूर्वोत्तर कोण वाली विदिशा (एक दिशा का नाम) कल्पवासी स्वर्गों का दूसरा कल्प।[[श्रेणी:शब्दकोष]]