रूपानुपान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपानुपान – देषव्रत का एक अतिचार।मर्यादा के बाहर काम करने वालो को निजरूपर दिखाकर अपना प्रयोजन बता देना। Rupanupata-making sign for persons beyond the limit, as the morse code with flags etc. (an infraction of Deshvrat)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपानुपान – देषव्रत का एक अतिचार।मर्यादा के बाहर काम करने वालो को निजरूपर दिखाकर अपना प्रयोजन बता देना। Rupanupata-making sign for persons beyond the limit, as the morse code with flags etc. (an infraction of Deshvrat)
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हनुरुह द्वीप – Hanuruuha Dviipa. Name of an island related to which the name of Hanuman was given. एक द्वीप। यहाॅ हनुमान की माता अंजना के मामा प्रतिसूर्य का राज्य था। हनुमान का यहाॅ जन्म संस्कार हुआ था, इसलिये इस द्वीप के नाम पर उनका हनुमान नामकरण हुआ था।
दन्डशूक A typical weapon. फणयुक्त एक शस्त्र, इसका गरूडास्त्र से निवारण किया जाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिस्थान – देष व सकल संयम प्राप्ति योग्य संयम स्थान। Labdhisthana-Attainment- station, states of super attainment
[[श्रेणी: शब्दकोष]]ह – Ha. The thirty-third consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का तैतीसवाॅ व्यंजन, इनका उच्चारण स्थान कण्ठ है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परदातृव्यपदेश:An infraction of vow of hospitality to donate indirectly and deceitfully.अतिथिसंविभाग व्रत का एक अतिचार पात्र को स्वयं दान न कर दूसरे से कहकर दिलवाना या दूसरे की वस्तु लाकर देना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्त निक्षेप – Sachitta Nikshepa. Food offering on green leaves, an infraction of vow of hospitality. हरे पत्तों पर रखकर आहार देना; अतिथिसंविभाग व्रत का एक अतिचार “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाभाविक शक्ति – ैअंइींअपां ैंाजपण् छंजनतंस चवूमत वत ेजतमदहजी पद जीम दंजनतम व िउंजजमतण् द्रव्य के स्वभावो मे स्वाभाविकी शक्ति होती है। देखे- स्वाभाविक क्रिया।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सकल-जिन – Sakala-Jina. The supreme one, destroyer of all 4 karmas. जो घातिया कर्मों का क्षय कर चुके हैं, ऐसे सशरीरी सकल परमात्मा अर्थात् अरिहंत भगवान “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वहिंसा – Svahimsaa. Passionate feelings as volitional violence. भावहिंसा-प्रमाद से युक्त आत्मा पहिले स्वंय अपने द्वारा ही अपना द्यात करता है अर्थात् रागादि प्रमाण भाव ही स्वहिंसा है।