मध्यम संख्यात!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम संख्यात- Madhyam Sankhayata. A mathematical term. एक गणितीय पद ” तीन, चार, पांच आदि एक कम उत्कृष्ट संख्यातपय्रत मध्यम संख्यात के भेद हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम संख्यात- Madhyam Sankhayata. A mathematical term. एक गणितीय पद ” तीन, चार, पांच आदि एक कम उत्कृष्ट संख्यातपय्रत मध्यम संख्यात के भेद हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राक्षस वंश – पिद्याधरो का एक वंष, ये न देव होते हे न राक्षस। राक्षस नामक द्वीप के रक्षक होने से राक्षस कहलाये। Raksasa vansa-Name of a dynasty
घनोदधि Circle of humid atmosphere. लोक को वेष्टित करने वाले तीन वातवलयों में प्रथम वलय।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समधी – Samadhee. Father of a son or daughter-in-law, the relationship between two persons. वर-वधू के पिता आपस मे एक दूसरे के समधी कहे जाते है। इस शब्द का अर्थ समान बुद्वि वाले होने के कारण दोनो पक्षों मे आपसी ऊॅच-नीच का भाव नही होना चाहिए।
चमरी A special cow having a tale with beautiful and soft hair. एक विशिष्ट गाय , इसकी पूँछ के बाल सुन्दर और कोमल होते हैं . जिनसे चमर बनाए जाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मधुस्त्रावी ऋद्धि – Madhusharvi Riddhi. A type of super- natural power causing freeness from all affliction of being by the hearing of a saint’s speech also it causes turning of tasteless food into sweet food. ऋद्धि; जिसके प्रभाव से ऋषि – मुनि के वचनों के श्रवण मात्र से मनुष्यतिर्यंच के दुखादिक नष्ट हो…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रात्रिभुक्तित्याग – रात्रि भोजन का त्याग करना, इसका पालन करना जैन श्रावक की पहचान है श्रावक की 11 प्रतिमाओं 6 प्रतिमा मन वचन कार्य से रात्रि में चतुर्विध आहार का त्याग करना। इस प्रतिमा का द्वितीय नाम द्विवामैथुन त्याग भी आता है। Ratribhuktityaga- Renunciation of night eating (meal), the sixth spiritual stage of house…
चक्रवाक The Chakva bird; a large orange brown duck, A space vehicle of ‘Shukrendra’. एक पक्षी-चकवा, शुकेंद्र का यान (विमान)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मदिरा – Madira. Intoxicating Liquor ; Wine , Alcohol. शराब, एक मादक पेय जिसका सेवन करना सप्तव्यसनों में एक व्यसन है”
तीसिय State of obscurring karmas of right knowledge, right perception etc. जिन कर्मों की तीस कोडाकोडी (सागर) की उत्कृष्ट स्थिति है ऐसे ज्ञानावरण, दर्शनावरण, अन्तराय, वेदनीय को तीसिय कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]