पुरुषवेदकर्मप्रकृति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषवेदकर्मप्रकृति – Purusavedakarmaprakrti. Name of the Karmic nature of male causing lust for female. जिस वेदकर्म के उदय से स्त्री में रमण करने की चाह हो “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषवेदकर्मप्रकृति – Purusavedakarmaprakrti. Name of the Karmic nature of male causing lust for female. जिस वेदकर्म के उदय से स्त्री में रमण करने की चाह हो “
गूढ़ क्षुल्लक Perfect loin-clothed Jaina saints (junior in rank). क्षुल्लक के तीन पदों में से एक पद ; जिन्होंने व्रतों क् पालन करने का पूर्ण अभ्यास कर लिया है वे साहसपूर्वक व्रतों को ग्रहण कर केटे हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रणिधि – Pranidhi. A type of deceit or illusion. माया का एक भेद ” व्यापार आदि में हीनाधिक कीमत की सदृशवस्तुओं को मिलाना ( जैसे-सोने में ताँबा आदि), वस्तुओं को तोलने में हेराफेरी करना आदि रूप मायाचार है “
आनंद Enjoyment, Ecstasy, The third past-birth name of Lord Parshvanath. हर्ष, प्रसन्नता, भगवान पाश्र्वनाथ के तृतीय पूर्व भव का नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रचय – Prachaya. Accumulation, collection, Togetherness. समूह, संग्रह, संचय, साधारण मेलजोल “
गगन चन्दन A city in the north of Vijayardh mountain. विजयार्ध पर्वत की उत्तर श्रेणी का एक नगर ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्योपजीवन – Vidyapajivana. A fault of food and hermitage related to saint (to attract donor with mystical knowledge). आहार एवं वसतिका का एक दोष; दातार को मंत्र तंत्रादि बताकर आहार एवं वसतिका प्राप्त करना साधु का विद्योपजीवी नामक दोष है “
गणनाथ भक्ति Adoring of Acharya saints. आचार्य भक्ति, सोलह कारण भावनाओं में एक भावना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उद्योतन Fair conception (free from any doubt, desire etc.). शंका कांक्षा आदि दोषों को दूर करना इसको सम्यक्त्वाराधना कहते है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गगनखंड Part of sky. नभ या आकाश खंड; जहाँ ज्योतिष देव अपनी-अपनी परिधियों में पंक्तिरूप से संचार करते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]