इंद्रावतार!
इंद्रावतार ncarnation of Indra as a Tirthankar (in the womb of mother). गर्भान्वयादि क्रियाओं में एक इन्द्र द्वारा सिद्ध भगवान को नमस्कार कर 16 स्वप्नों द्वारा माता को अपने अवतार की सूचना देना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
इंद्रावतार ncarnation of Indra as a Tirthankar (in the womb of mother). गर्भान्वयादि क्रियाओं में एक इन्द्र द्वारा सिद्ध भगवान को नमस्कार कर 16 स्वप्नों द्वारा माता को अपने अवतार की सूचना देना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आप्तमीमांसा वचनिका Name of a treatise. जयचंद्र छाबड़ा कृत एक ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तरेप्पन क्रिया वृत Union or association with youngs (which is prohibited in relation to observing celibacy). श्रावक की 53 क्रियाओं के वृत – अष्टमूलगुण , बारह व्रत, बारहि तप, समता भाव, ग्यारह प्रतिमाएं, चार दान, पानी छानकर पीना, रात्रि भोजन त्याग, सम्यग्दर्शन सम्यग्ज्ञान आसैर सम्यग्चारित्र के वृत । इनकी विधिस ग्रंथों में देखें। [[श्रेणी: शब्दकोष…
तर्क Argument, Inductive reasoning, Logic. उपलब्धि और अनुपलब्धि की सहायता से होने वाला व्याप्तिज्ञान जैसे – धुएँ को देखकर अग्नि का ज्ञान होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
इंद्र(नाम) Son of the king Sahasrar. राजा सहस्रार का पुत्र माली को मारकर इन्द्र के सदृश राज्य किया आगे रावण से युद्ध में हारकर दीक्षा ले निर्वाण प्राप्त किया।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तपशुद्धि Purity through austerity. सदा संयम, समिति, ध्यान और योगों में प्रमाद रहित होते हुए तपश्चरण तथा तेरह प्रकार के चारित्र में उद्यमी रहने हुए पापों का नाश करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीधर – Shreedhara. Name of a great Acharya, the learned one in mathematics and Astrology, Name of a poet. गणित तथा ज्योतिष विद्या के विद्वान दिगम्ब्राचार्य ” गणितसार संग्रह, ज्योतिर्ज्ञानविधि, जातक तिलक, लीलावती (कन्नड़) के रचयिता (समय- ई. 799-865) ” एक अपभ्रंश कवि सुकुमाल चरिउ के रचियता (समय ई. 1151) “
तदुभय प्रायश्चित्त A type of repentance (related to self criticism). प्रायश्चित्त के 10 भेदों में एक भेद आलोचना और प्रतिक्रमण दोनों का संसर्ग होने पर दोषों का शोधन होने से तदुभय प्रायश्चित्त है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रावकाचार – Shraavakaachaara. Conduct of householders or lay followers. एकदेश चारित्र; 5 अणुव्रत, 3 गुणव्रत, 4 शिक्षाव्रत का पालन “