ईर्यापथ आस्रव!
ईर्यापथ आस्रव A type of Karmic flow. जो कर्म वर्गणा मात्र योगों से आये कषाय का उदय न हो यह 11 वें, 12 वें व 13वें गुणस्थान में होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ईर्यापथ आस्रव A type of Karmic flow. जो कर्म वर्गणा मात्र योगों से आये कषाय का उदय न हो यह 11 वें, 12 वें व 13वें गुणस्थान में होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपाक – Vipaka. Fruition of karmas. कर्मों का फल देना अथवा द्रव्य, क्षेत्र, काल, भव, भाव इन ५ निमित्तों के द्वारा कर्मों का अनेक प्रकार से पाक होना अथवा फल देना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिथ्या श्रुतज्ञान–Mithya shrutagyan. False scriptural knowledge. मिथ्यादर्शन के उदय के साथ श्रुतज्ञान मिथ्या श्रुतज्ञान कहलाता है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुशुण्डी – Bhushundi. A weapon used in the time of Ravana. एक शस्त्र, इसका उपयोग रावण के काल में हुआ है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] माणिक्यनंदि – Manikyanamdi. Name of the disciple of Ratnanandi and pre-cepter of Magehchandra, and the disciple of Acharya Ramnandi. नंदिसंघ बलात्कारगण में रत्ननन्दी के शिष्य तथा मेघचंद्र के गुरु (ई. सं. ६६३-६७९), आचार्य रामनंदी के शिष्य परीक्षामुख सूत्र के कर्ता आचार्य (ई. स. १००३-१०२८) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेद पक्ष:Acceptance of something with alternative viewpoints. द्रव्य को गुण व पर्याय की अपेक्षा ग्रहण करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाटी संहिता – श्रावकाचार विशयक पडित राजमल्ल कृत ग्रथ इसमें सात सर्ग एवं 1400 ष्लोक हैं। Lati Samhita-Name of a treatise written by Pandit rajmalla
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृषभसेन – Vrsabhasena. The younger brother of Bharat Chakravarti, who became first chief disciple of Lord Rishabhdev.Name of a king of Rajgrahi city. भरत चक्रवर्ती के छोटे भाई जो की पुरिमतालपुर के राजा थे ये भगवन ॠषभदेव के प्रथम गणधर बने राजगृही के एक राजा का नाम जिन्होने तीर्थकर मुनिसुव्रत को आहार…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूद्रवसंत व्रत – क्रमष 2,3,4,5,6,6,4,3,2 इस प्रकार 35 उपवास करना।बीच के स्थानो में पारणा व नमस्कार मंत्र की त्रिकाल जाप करना। Rudravasamta Vrata-A specified procedural vow (fasting)