दिग्नाग!
दिग्नाग Name of a Bauddhist personality एक बौद्ध विद्धान।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चतुरावश्यक Four super necessities of the 7th stage of spiritual development. अनंतगुणी विशुद्धि , अप्रशास्ता प्रकृतियों की अनंतगुणी हानि, प्रशस्त प्रकृतियों में अनंतगुणी वृद्धि , स्थिति बंधापसरन ये ४ आवश्यक कार्य अधःप्रवृत्तकरण संयत अर्थात् सप्तम गुणस्थानवर्ती मुनि के होते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सापेक्ष धर्म – Saapeksa Dharma. Relative properties in matters. अनेकांत,सप्तभंगी अर्थात् वस्तु में प्ये जाने वाले विरोधी धर्म जो एक दूसरे पर निर्भर रहते है।
ऋजुगति Straight motion. वर्तमान शरीर को डोड़कर आगामी भव में जाते हुए जीव की जो सरल मोड़ा रहित एक सरल वाली गति।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिलोकगुरू One who is great in all three worlds. अनंत ज्ञानादि महान गुणों के द्वारा जो तीन लोकों में भी महान् है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधुधर्म – Saadhudharma. Basic restraints, conduct & discipline of Jain saints. अनगार धर्म । संसार शरीर भोगों से विरक्ति, ज्ञानाचार आदि 5 आचार, 10 धर्म, संयम, मूलगुण और तपरूप उत्तरगुण, मिथ्यात्व मोह आदि का नाष, कषायों का शमन , इन्द्रिय दमन, निर्मल रत्नत्रय तथा अंत में समाधि मरण यह सब मोक्षपद में कारण मुनियों…
चतुर्दश पूर्वधर Acharyas possessing knowledge of 14 Purvas. १४ पूर्व के ज्ञाता ५ मुनि ; विष्णु , नंदिमित्र , अपराजित , गोवर्धन , भद्रबाहु ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्थकाल The fourth division of Avasarpini Kal (regressive half cycle of time). अवसर्पिणी काल के ६ भेदों में दुषमा-सुषमा नामक चौथा भेद , जिसमें २४ तीर्थंकर जन्म लेते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधिक जघन्य – Saadhika Jaghanya. Some more than lowerst. जघन्य से कुछ अधिक ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमार्थ तत्व:Another name of ‘Shuddopayog (supreme ele-ment).शुद्वोपयोग का अपरनाम ।