रोग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोग – रूजा, बीमारी, व्याधि। रोगो की कुल संख्या पांच करोड अडसठ लाख निन्यानवे हजार पांच सौ चोरासी है। ये रोग नारकियों के एक साथ होते है। Roga-Disease
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोग – रूजा, बीमारी, व्याधि। रोगो की कुल संख्या पांच करोड अडसठ लाख निन्यानवे हजार पांच सौ चोरासी है। ये रोग नारकियों के एक साथ होते है। Roga-Disease
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लांगलावर्ता – पष्चिम विदेह क्षेत्र के 8 देषो मे एक देष। मंजूशा नगरी इसकी राजधानी है। Lamgalavarta-Name of a country of western videh (region) having the capital city Manjusha
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पातक :Sin, offence, impurity caused due to the death of someone having blood relation.पाप, संबंधी के मरण के समय का अशैच या अपवित्रता। यह वंश परम्परा की पीढि़या के अनुसार 6 माह, 12 दिन, 10 दिन इत्यादि का माना जाता है। पातक के समय भगवान का अभिषेक-पूजन, शास्त्र स्वाध्याय, गुरुओ को आहारदान इत्यादि धार्मिक…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रात्रियोग – साधुओं का एक कृति कर्म। सायंकालीन प्रतिक्रमण के पष्चात योग भक्तिपूर्वक जैन साधु रात्रियोग धारण करते है।प्रात कालीन सामायिक से पूर्व योग भक्तिपूर्वक ही उसका निश्ठापान करते हैं। Ratriyoga-Meditation activities to be observed by saints during night hours (an austerity)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाटला:Name of the initiation tree of Lord vasupujyanath.पद्यपुराण के अनुसार वासुपूज्यनाथ भगवान के दीक्षा वृक्ष का नाम (इसका नाम महापुराण के अनुसार कदम्ब है)।
द्रोणामुख Port; docks. बंदरगाह; जलयानों के ठहरने का स्थान। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पांडुकंबला शिला:Name of a shila (very auspicious large stone at sameru mountain) pertaining to the lustral bath of Jaina Lord of weatern videk kshetra (region).सुमेरु पर्वत पर एक शिला, जिस पर पश्चिम विदेह के तीर्थकरो का जन्म कल्याणक संबंधी अभिषेक किया जाता हैं।
द्रव्यांश Parts of a matter. द्रव्य का एक भाग उत्पाद व्यय घ्रौव्य रूप परिवर्तन पूरे द्रव्य में होता है किसी एक अंश में नहीं।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाष्य सूक्ति – Bhasya Sukti. Name of a treatise written by jagadish Bhattacharya. वैशेषिक दर्शन सूत्र पर लिखी जगदीश भट्टाचार्य कृत एक व्रत्ति का नाम “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यज्ञगुप्त –Yagyagupta. Name of the 49th chief disciple of Lord Rishabhdev. तीर्थंकर ऋषभदेव के 49वें गणधर का नाम”