विदेह!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदेह – Videha. Salvated souls, free from birth & death cycle. देह रहित सिध्द भगवान विदेह कहलाते हैं ” अथवा देह में रहते हुए भी जो जन्म – मरण से रहित हैं ऐसे अर्हत भगवान विदेह हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदेह – Videha. Salvated souls, free from birth & death cycle. देह रहित सिध्द भगवान विदेह कहलाते हैं ” अथवा देह में रहते हुए भी जो जन्म – मरण से रहित हैं ऐसे अर्हत भगवान विदेह हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभावना सत्य – Sanbhaavanaa Satya. Truth pertaining to probability or possibility. वस्तु के स्वभाव को कहने वाला वचन या जैसी इच्छा रखे वैसा कर सके यह संभावना सत्य है ” जैसे- इच्छा करे तो इन्द्र जम्बूद्वीप को पलट सकता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैदूर्यसागर द्वीप –VAiduryasagaraDvipa. Name of an island and an ocean of middle universe मध्यलोक के सागर और द्वीप का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्वेत – Shveta. The initiation & omniscience forest of Lord Mallinath. तीर्थंकर मल्लिनाथ का दीक्षा एवं केवलज्ञान वन “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध उत्सरण -बंध का उत्कर्षण (बढ़ना) होना । BandhaUtsarana- Bond progression.
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विष्कंभ –Viskambha. Diameter, Expansion. व्रत का व्यास, विस्तार, लम्बाई “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेणीचारण ऋद्धि – Shreneechaarana Riddhi. A type of super natural power related to the careful walking over smoke, fire etc. एक चारण ऋद्धि जिसके प्रभाव से धूम, अग्नि पर्वत और वृक्ष के तन्तु समूह पर से ऊपर चढ़ने की शक्ति प्राप्त होती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रक्षेपक – Praksepaka. Projector; one who throws, A quantity related with Jainology. फेंकने या ऊछालने वाला, जघन्य पर्याय में जीवराशि अनंत का भाग देने पर जो राशि आये वह प्रक्षेपक है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतपंचमी क्रिया – Shrutapanchmee Kriyaa. A religious devotional procedure of eulogy. ज्येष्ठ शु. 5 को श्रुतपंचमी कहते हैं ” इस दिन सभी साधु बृहत् सिद्ध भक्ति और बृहत् श्रुत भक्ति पढ़कर श्रुतस्कंध की स्थापना करके श्री इंद्रनंदि आचार्य विरचित श्रुतावतार का उपदेश देने के अनन्तर बृहत् श्रुत भक्ति व बृहत् आचार्य भक्ति पढ़कर स्वाध्याय…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावपुण्य – Bhava Punya. Auspicious thought- activity of soul. दान, पूजा षडावश्यकादि रूप जीव के शुभ परिणाम भावपुण्य हैं “