जयधवला!
जयधवला A book written by Acharya Yativrishabh. आचार्य यतिवृषभ(ई. १५०-१८०) कृत कषायपाहुड़ ग्रन्थ की ६०,००० श्लोक प्रमाण विस्तृत टीका है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जयधवला A book written by Acharya Yativrishabh. आचार्य यतिवृषभ(ई. १५०-१८०) कृत कषायपाहुड़ ग्रन्थ की ६०,००० श्लोक प्रमाण विस्तृत टीका है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादस्ति अवक्तव्य – Syaadasti Avaktavya. The 5th Bhang of saptabhangi-exposition of the nature of the substance in the expects of affirmation & indescribability.संप्तभंगी का 5 वां भंग-किसी अपेक्षा से है और किसी अपेक्षा से अवक्तव्य है अर्थात् स्वचतुष्टय (द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव) की अपेक्षा द्रव्य कथंचित् आस्ति रुप है और वही द्रव्य स्व एवं…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाषा द्रव्य वर्गंणा – Bhasha Dravya Vargana. One of the aggregates of karmic molecules; causing formation of speech. १३ पुद्ग्ल स्कंध वर्गंणाओं में एक; इसी से वचन बनते हैं, एक-एक वर्गणा में अनंत परमाणु होते हैं “
जटामुकुट Crown of matted and braided type of hair (pertaining to idols). प्रतिमाओं का लक्षण ‘ जटा मुकुट धारण न करना मोह के अभाव का प्रतीक है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहभाव – Sahabhaava. Association, Co-existence. अविनाभाव के दो भेदों में एक भेद । साथ रहने वाले में तथा व्याप्य और व्यापक पदार्थो में सहभाव नियम नाम का अविनाभाव होता है। जैसे – द्रव्य व गुण में ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव लोभ विवेक – Bhava Lobha Viveka. Wisdom of abstinence from delusion or greed. यह मेरा है’ इस तरह की मोह्जन्य परिणति को न होने देना “
जगत्प्रतर Area of universe, unit of 49 Rajus. (जगतश्रेणी)२=४९ राजू , जगतश्रेणी के वर्ग को जगत्प्रर कहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्मितगिरि – Smitagirrii. Name of a mountain of Bharat Kshetra (region).भरत क्षेत्रस्थ एक पर्वत।
[[श्रेणी :शब्दकोष ]] मिश्र काल–Mishra Kaal. The time period upto the completion of body. जब तक शरीर पर्याप्ति पूर्ण ना हो तब तक का काल”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोषवचन–Moshavachan. Speech causing stealing. असत्य वचन; चोरी में प्रवृत्ति कराने वाले वचन”