नंदि अन्वय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नंदि अन्वय – Namdi Anvaya A group of saints of Dravid sangh. द्रविड़ संघ के एक गच्छ का नाम ”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नंदि अन्वय – Namdi Anvaya A group of saints of Dravid sangh. द्रविड़ संघ के एक गच्छ का नाम ”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांसारिक दुःख – Saansaarika Duhkha. Worldly affictions or troubles. लौकिक विषयों से उत्पन्न दुःख अर्थात् भोगसाधनात्मक भोगो का वियोग होने से जो दुःख उत्पन्न होता है। संसारी जीवों का इन्द्रिय सुख वासना जनित होने के कारण होने के कारण दुःखमय ही है क्योंकि आपत्त्किाल मे भोग व रोग चित्त मे उद्वेग करने वाले है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] The spiritual teacher or preceptor of Padmanandi-6, A disciple of Kaldhautanandi(a saint). आचार्य पद्मनन्दि नं. 6 के गुरु, देशीयगण की तृतीय शाखा में कल्धौतनिन्द के शिष्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहायक कारण – Sahaayaka Kaarana. A helping cause. एक कारण । जो स्वयं कार्यरूप परिणाम वह उपादान कारण है तथा उसमें सहयक होने वाले पर द्रव्य व गुण निमित्त सहायक कारण है। इसे बलाधान या उदासीन निमित्त भी कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Name of a Digambar Jain saint, the disciple of Charitra Chakravarti Acharya Shri Shantisagar ji Maharaj. चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रमुख 7 मुनि शिष्यों में से एक ” इनकी प्रेरणा से दिल्ली एवं पश्चिमी उत्तरप्रदेश में अनेक स्थानों पर शिक्षण संस्थान तथा पारमार्थिक औषधालय खुले हैं ” 4 समय –…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पौराणिक राजवंश – Pauranika Rajavansha. Ancient dynasties like lkshvaku, Ugra, Kuru etc. इक्ष्वाकु वंश, उग्र्वंश, सुर्यवंश, कुंरुवंश, नाथवंश इत्यादि समस्त पौराणिक वंश कहलाते हैं “
ध्वजभूमि The 5th land of Samavasharan – assembly of Lord. समवशरण की पाँचवी भूमि । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रध्वंसाभाव- 4 अभावों के भेदों में एक भेद; आगामी पर्याय में वर्तमान पर्याय का अभाव प्रध्वंसाभव है। जैसे-दही का घी में आभाव। pradhvamsabhava – a type of lacking, absence of present into future.
ध्यानांतरिकी Internal meditational state. ध्यान-मग्न स्थिति। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशघात- कर्मो का अपकर्शण या नश्ट होना। pradesaghata – destruction or karmas