सर्जकषाय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्जकषाय – Sarja Kashaaya. Bitter or pungent passions. सर्ज साल नाम के वृक्ष को कहते है। उसके कषैले रस के समान जीव की कषायरूप् परिणति को सर्जकषाय कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्जकषाय – Sarja Kashaaya. Bitter or pungent passions. सर्ज साल नाम के वृक्ष को कहते है। उसके कषैले रस के समान जीव की कषायरूप् परिणति को सर्जकषाय कहते है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदविभागी: A kind of Criticism, A kind of good conduct of saint. आलोचना का एक भेद, क्षेपक क्षरा आचाय्र्र के आगे क्रम से दोषो की आलोचना करना, साधुओं के क्षरा की जाने वाली समाचारी विधि का एक भेद, समस्त दिन एवं रात की परिपाटी में मुनियों क्षरा नियामें का निरन्तर आचरण करना ।
चारित्रवृद्ध Abundance in character and austerity. चारित्र- तप आदि की अधिकता ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पतिव्रत: Loyalty of fidelity to a husband-a characteristic of India calture. भारतीय संस्कृति में नारी का एक विषेष धर्म अपने पति के प्रति एकनिश्ठ समर्पण एवं भक्ति का भाव रखना व अन्य पुरूष के प्रति पिता, पुत्र एवं भाई के समान भाव एवं व्यवहार रखना ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार]] [[ श्रेणी:शब्दकोष]] == कायोत्सर्ग : == दैवसिकनियमादिषु, यथोक्तमानेन उक्तकाले। जिनगुणचिन्तनयुक्त:, कायोत्सर्गस्तनुविसर्ग:।। —समणसुत्त : ४३४ दैनिक प्रतिक्रमण के नियमानुसार यथोचित समयावधि (२७ श्वासोच्छ्वास) तक जिनप्रभु के गुणों का चिन्तन करते हुए शरीर की ममता को छोड़ देना कायोत्सर्ग है। देहमति: जाड्यशुद्धि: सुखदु:ख—तितिक्षता अनुप्रेक्षा। ध्यायति च शुभं ध्यानम् एकाग्र: कायोत्सर्गे।। —समणसुत्त : ४८१ कायोत्सर्ग करने…
चारित्रपंडित Noble and learned person having good conduct. सामायिक छेदोपस्थापना आदि पांच प्रकार के चारित्र के धारक मुनि ।।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पृहा – Sprhaa. Longing, intention, desire.वांछा, इच्छा, कामना, अभिलाषा।