वाचक-वाच्य संबंध!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचक-वाच्य संबंध – Vaachaka-Vaachya Sanbandha.: Relation between words & their meanings. शब्द और अर्थ का संबंध “अर्थात शब्द वाचक एवं उसका अर्थ वाच्य कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचक-वाच्य संबंध – Vaachaka-Vaachya Sanbandha.: Relation between words & their meanings. शब्द और अर्थ का संबंध “अर्थात शब्द वाचक एवं उसका अर्थ वाच्य कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचश्रुतज्ञान व्रत – Panchashrutagyaana Vrata. 168 vows (fasting) with particular procedure. एक उपवास एक पारणा से 168 उपवास करना “
उपचार विनय Formal respect, Reverential homage. आचार्य आदि के समक्षा आने पर खडे़ हो जाना उनके पीछे-पीछे चलना और नमस्कार आदि करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाक्शुद्धि –Vaakshuddhi.: Renunciation of cruel speech or language controlling. कठोर कर्कश वचनों का त्याग कर सावधानी पूर्वक बोलना ” देखें –वचन शुद्धि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचमेरु – Panchameru. Five auspicious adorable mountains with temples having number of Jaina idols. ढाई द्वीप सम्बंधी पांच मेरु (पर्वत)-सुदर्शन, विजय, अचल, मंदर, विद्युन्माली मेरु पर्वत पूजा; पाँचों मेरु (पर्वतों) पर स्थित अस्सी चैत्यालयों की समस्त प्रतिमाओं की पूजा “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोक्ष पुरुषार्थ –Moksha Purusharth. Reverential austerities for getting salvation. मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाने वाला तप आदि जो कि साक्षात् कल्याणप्रद है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचपरमेष्ठी – Panchaparameshthee. Five ultimate &supreme souls of Jaina stream (Arhant, Siddha, Acharya, Upadhayay & Sadhu). अर्हंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधू “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वस्तुत्व – Vastutva.: Nature or reality of any matter or substance. वस्तु के भाव को वस्तुत्व कहते हैं (वस्तु सामान्य विशेषात्मकपना ) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसा – Vasaa: Fat, Marrow, Grease. मेद , चर्बी . मज्जा ” औदरिक शरीर की एक धातु ” यह 3 अंजुलि प्रमाण रहती है “