मूर्तिक पदार्थ!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्तिक पदार्थ–Muurtik Padarth. Tangible matters, which can be touched, tested & felt etc. रूपी पदार्थ जिसमे स्पर्श, रस, गंध, वर्ण गुण पाए जाते है”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्तिक पदार्थ–Muurtik Padarth. Tangible matters, which can be touched, tested & felt etc. रूपी पदार्थ जिसमे स्पर्श, रस, गंध, वर्ण गुण पाए जाते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलात्कार गण- जैनाचार्यों की शाखा; कुंदकुंद आचार्य के समय से प्रचलित। जैसा कि प्रशस्ति आदि में लिखित रहता है- कुन्दकुन्दाम्नाये सरस्वती गच्छे बलात्कार गणे………। Balatkara Gana- A branch of jain acharyas
देवदत्ता A reverential palanquin (pertaining to Lord Vimalnath). एक पालकी तीर्थंकर विमलनाथ इसी पर आरूढ़ होकर दीक्षा लेने हेतु सहेतुक वन गये थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बप्रिला- नमिनाथ भगवान की मााता का नाम। अपरनाम-वप्पिला या वर्मिला। Baprila- Mother’s name of lord Naminath
चक्षुदर्शन Visionary conation, ocular perception. चक्षु इन्द्रिय के द्वारा पदार्थ का ज्ञान होने से पूर्व जियो सामान्य प्रतिभास होता है वह चक्षुदर्शन है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बादर सांपरायिक बंधक- निक्षेप की अपेक्षा बंधक का एक भेद। Badara Samparayika Bamdhaka- A type of karmic binder
त्रैविद्यदेव Title for some Acharyas in Nandi sangh (group) etc. कतिपय आचार्यों की उपाधि जैसे नन्दि संघ के देशीयगण की गुर्वावली के अनुसार पाँच आचार्यों की उपाधि, कातंत्र रूपमाला व्याकरण के भावसेन – त्रैविद्य टीकाकार आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संघात – Sanghaata. Aggregate, Collection, A type of Shrutgyan (scriptual knowledge) related to wholesome increase of knowledge. समूह, जमाव, श्रुतज्ञान के 20 भेदों में 7वां भेद; एक-एक पद के अक्षर की वृद्धि के क्रम से संख्यात हजार पदों के बढ़ जाने पर यह संघात श्रुतज्ञान होता है “