भव्यसिद्ध!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्यसिद्ध – Bhavyasiddha. The soul worthy of getting bodiless salvation. जो जीव सिद्ध पद की प्राप्ति के योग्य हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्यसिद्ध – Bhavyasiddha. The soul worthy of getting bodiless salvation. जो जीव सिद्ध पद की प्राप्ति के योग्य हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपर्यय ज्ञान – Viparyaya Jnana. Wrong knowledge or faith. एक पक्ष का निश्चय करने वाले विपरीत ज्ञान को विपर्यय कहते हैं ” जैसे – सीप में ‘यह चांदी है’ इस प्रकार का ज्ञान होना “
तथाकार Assent of the instructions of Lord Arihant. समाचार का एक भेदः जीवादि का परम्पराा से चला आया उपदेश और सूत्रादि – इनमें जो अर्हंत ने कहा वह सत्य है, ऐसा समझना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भम्भा – Bhambha. Name of an auspicious musical instrument. राम के समय का एक मंगल वाघ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीरचर्या –Vircarya. Strict and pure conduct of Jaina saints. निग्रन्थ मुनि की निर्दोष चर्या अथार्त कठोर आचरण “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वार्थपुर – Sarvaarthapura. Name of a city in the north of Vijayardh mountain. विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूत शरीर – Bhuta Sharir. See- Bhuta gyanaka Sharir. देखें – भूत ज्ञायक शरीर “
एक – अंशग्राही ज्ञान Partial perceptual knowledge. प्रमाण के द्वारा ग्रहण की गई वस्तु के वस्तु के एक अंश में वस्तु का निश्चय करने वाला ज्ञान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]