रूक्षाणु!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूक्षाणु – रूक्ष गुण वाला अणु। इसका दो अधिक गुण वाले विपरीत अणुओं के साथ बंध होता है। Ruksanu-Particles with having property of roughness
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूक्षाणु – रूक्ष गुण वाला अणु। इसका दो अधिक गुण वाले विपरीत अणुओं के साथ बंध होता है। Ruksanu-Particles with having property of roughness
आहारक शरीर नामकर्म प्रकृति Chief and secondary parts of Aharak Sharir. वह नामकर्म प्रकृति जिससे आहारक शरीर बनता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्जरा अनुप्रेक्षा – Nirjaraa Anuprekshaa. Contmplation on dissociation of karmas निर्जरा में निमित ऐसे अनशन आदि 12 प्रकार के तप का विचार करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सकलेन्द्रिय – Sakalendriya. All five sensed beings. पंचेन्द्रिय जीव सकलेन्द्रिय कहलाता है अर्थात् जिसके पांचो इन्द्रिय है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरुद्ध अविचार भक्त प्रत्याख्यान – Niruddha Avichaara Bhakta Pratyaakhyaana. Slow renunciation of food for ritualistic death. सल्लेखना की एक विधि-रोग से पीड़ित हो जाने के कारणजिसका जंघाबल क्षीण हो गया हो, ऐसे मुनि इस विधिपूर्वक समाधि ग्रहण करते है “
दीर्घदर्शी One foresighted, discerning or learned. दूरदर्शी दूर तक की बात सोचने वाला।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराकार उपयोग – Nirakaara Upayoga . Apprehension of shapelessness. दर्शनोंपयोग; जिसमें आकार रहित पदार्थ का सामान्य आभास होता है ” अर्थात् निश्चयरहित ज्ञान का नाम निराकार उपयोग है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रसायिक – रस आसव आदि में उत्पन्न होने वाले जीव। Rasayika-Micro beings taking birth in impure liquids
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुवत्सा – Suvatsaa. Name of a country and name of a summit & its governing deity of Trikut Vakshar situated in eastern Videh (region). पूर्व विदेह क्षेत्र का एक देष, कुण्डला नगरी यहाॅं की राजधानी है, पूर्व विदेहस्त त्रिकूट वक्षार का एक कूट व उसका स्वामी देव ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरनुबन्ध योग – Niranubandha Yoga. Activities (reg.mind, speech & body) without binding of new Karmas. बन्ध रहित योग “