उपाधि!
उपाधि Rank, Alien belonging, Attachment, Requisites. पदवी, संसार से मोह अर्थात साधन के साथ अव्यापक और साध्य के व्यापक हेतु को उपाधि कहा जाता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपाधि Rank, Alien belonging, Attachment, Requisites. पदवी, संसार से मोह अर्थात साधन के साथ अव्यापक और साध्य के व्यापक हेतु को उपाधि कहा जाता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीरसंघात नामकर्म – Shareera Sanghaata Naamkarma. Physique making Karmas causing association of body. जिसके उदय से औदारिक आदि शरीरों की छिद्र रहित होकर परस्पर प्रदेशों में एकरूपता आती है ” यदि शरीर संघात नामकर्म संज्ञा न हो तो तिल के मोदक के सामान शरीर अपुष्ट रहेगा “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव संयोगपद – Bhava Samyogapada. Compound words showing passions. पद का एक भेद; क्रोधी, मानी, मायावी और लोभी इत्यादि नाम जो भावों के निमित्त से व्यवहार में आते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वृत्ति मार्ग – Nirvrtti Marga. Path of salvation. त्याग मार्ग,मुनि व त्यागी होने की तरफ चलना (महाव्रतों को धारण करना) “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूल–Mula. Name of a lunar, Original, Real, Basic. एक नक्षत्र, मुख्य, जड़, वास्तविक.
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मानी : == योऽपमानकरणं दोषं, परिहरति नित्यमायुक्त:। सो नाम भवति मानी, न गुणत्यक्तेन मानेन।। —समणसुत्त : ८९ जो दूसरे को अपमानित करने के दोष का सदा सावधानीपूर्वक परिहार करता है, वही यथार्थ में मानी है। गुणशल्य अभिमान करने से कोई मानी नहीं होता।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्यदत्त – Satyadatta. One of the 32 principles of modesty or courtesy, Name of the main listener in the assembely of Lord Dharmnath. एक विनयवादी, विनयवादियों के 32 भेदों में एक भेद, तीर्थंकर धर्मनाथ का मुख्य श्रोता या प्रश्नकर्ता “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुक्ताशक्ति मौद्रा–Muktashakti Vrat. A posture with joined hands placed together and raised to pay reverence. वन्दनामुद्रावत ही खड़े होकर, दोनों कुहनियो को पेट के ऊपर रखकर, दोनों हाथो की उंगलियो को आकार विशेष द्वारा आपस में संलगन करके मुकुलित बनाना”