नागश्री चंपापुरी में नागशर्मा ब्राह्मण की एकमात्र लाडली नागश्री कन्या एक दिन सहेलियों के साथ वन में नागपूजा करने गई थी। वहाँ पर दो जैन मुनि मिल गये। उन्हें नमस्कार करके उनके पास बैठ गई। तब मुनिराज ने उसे धर्मोपदेश सुनाया, पुन: पाँच अणुव्रत भी उसे प्रदान कर दिये। आगे क्या होता है, सो वही…
नकारना भी आना चाहिए पशुओं का मेला लगा हुआ था। अनेक बेचने वाले और अनेक खरीदने वाले। एक व्यक्ति ने सौदागर से अनेक पशु खरीदे। उस सौदागर के पास एक कुत्ता भी था। उसने कहा— ‘ आप ने अन्यान्य सारे पशु खरीद लिए, इस कुत्ते को क्यों छोड़ा ? आप इसे ले जाएं, यह बड़ा…
अर्थ का आकर्षण तीन व्यक्तियों की एक ही समय मृत्यु हुई। यमराज ने तीनों से पूछा— ‘ बताओ, कहाँ जाना चाहते हो ? एक ने कहा— ‘ मैं रत्नों का व्यापारी था, करोड़ों के हीरे—जवाहिरात का मेरा धंधा था। अभी बच्चे कुशल नहीं बने हैं। इस बार पुन: वहीं भेजें। दूसरे ने कहा— ‘मैं मिल…
अपनी मदद अपने हाथ किसी नगर में एक किसान रहता था। उसके पास एक गाय और एक घोड़ा था। दोनों साथ—साथ जंगल में घास चरते थे। किसान के पड़ोंस में एक धोबी रहता था।उसके पास एक गधा और एक बकरी थी। धोबी भी अपने इन पालतू जानवरों को उसी जंगल में चरने के लिए छोड़…
धर्मचक्र से सदाचार का प्रवर्तन होता है —विद्यावारिधि डॉ. महेन्द्र सागर प्रचण्डिया यूनानी सम्राट सिकन्दर के मन में विश्व विजेता बनने की लालसा उत्पन्न हुई। अपनी कामना पूर्ण करने के लिए वह एक चमत्कारी योगी के आश्रम में पहुँचा। यथायोग्य सेवा—सुश्रषा कर उसने योगी का प्रसन्न किया। योगी ने सिकन्दर के विश्व—विजयी होने के मनोरथ…
अपना नजरिया यह रूसी कहानी किसी गांव में रहने वाले एक युवक के बारे में जिसे सभी मूर्ख कहते थे। बचपन से ही यही सुनता आ रहा था कि वह मूर्ख है। उसके माता—पिता, रिश्तेदार, पड़ोसी सभी उसे मूर्ख कहते थे और वह इस बात पर यकीन करने लगा कि जब इतने बड़े—बड़े लोग उसे…
जटायु पक्षी सुधा-माताजी! मुझे आज आहारदान का महत्त्व बतलाइये। आर्यिका-सुनो बेटी! मैं तुम्हें बहुत ही सुन्दर एक कथा सुनाती हूँ, जो कि धर्म मेें महान प्रेम और पाप से महान भय उत्पन्न कराने वाली है। श्री रामचन्द्र, सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास में घूमते-घूमते किसी महावन में पहुँच गये। वहाँ लक्ष्मण ने नाना प्रकार…
ध्यान माधुरी-माताजी! आज ध्यान की चर्चा जहाँ-तहाँ चलती रहती है, वह ध्यान क्या है? और उसके कौन-कौन से भेद हैं? माताजी-एकाग्रचिन्तानिरोध होना अर्थात् किसी एक विषय पर मन का स्थिर हो जाना ध्यान है। यह ध्यान उत्तम संहनन वाले मनुष्य के अधिक से अधिक अन्तर्मुहूर्त तक ही हो सकता है। इस ध्यान के आर्त, रौद्र,…
अनुभवी की सलाह श्री सुरेश जैन सरल बड़ों का विश्वास करना उचित कहा गया है। विवेकवान व्यक्ति ही विश्वास करते हैं, विवेक शून्य नहीं। वृद्ध या अनुभवी पर विश्वास कर लेने की एक कथा सदियों से मानव—मन को दिशा प्रदान कर रही है। कथा है कि— एक जंगल में एक विशाल वृक्ष पर कुछ हंस…