कुण्डलपुर तीर्थ पूजा
कुण्डलपुर तीर्थ पूजा रचयित्री-आर्यिका चन्दनामती स्थापना (चौबोल छन्द) महावीर…
कुण्डलपुर तीर्थ पूजा रचयित्री-आर्यिका चन्दनामती स्थापना (चौबोल छन्द) महावीर…
कवलचान्द्रायण पूजा सकलगुणसमुद्रं देवदेवेन्द्रवंद्यम्। विमलवपुषि पीठे तीर्थतोयैश्च धौते।। वसुमितजिनदेवं चंद्रधौतं नमामि। सकलदुरतिव्यूहं हर्तुकामो भजेऽहम्।।१।। ॐ ह्रीं शशांकगोक्षीरधवलगात्र श्री चंद्रप्रभदेव! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं। ॐ ह्रीं शशांकगोक्षीरधवलगात्र श्री चंद्रप्रभदेव! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं। ॐ ह्रीं शशांकगोक्षीरधवलगात्र श्री चंद्रप्रभदेव! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं। …
अकम्पनाचार्यादि सात सौ मुनियों की पूजन तर्ज – धीरे-धीरे बोल कोई सुन ना ले. स्थापना सात शतक मुनिवरों की अर्चना करूँ, अर्चना करूँ इनकी वंदना करूँ। ये अकम्पनाचार्यादि थे, उपसर्गजयी मुनिराज थे।।सात शतक.।।टेक.।। हस्तिनागपुर नगरी के उद्यान में, एक बार इन मुनि के चातुर्मास थे। अग्नी का उपसर्ग किया बलि आदि ने, दूर…
कल्याणमंदिर पूजा स्थापना शंभु छंद हे प्रभुवर पारस नाथ! तुम्हीं, कल्याण के मंदिर कहलाते। सब कार्यों की सिद्धी हेतु, सब भव्य तुम्हारे गुण गाते।। श्री कुमुदचन्द्र आचार्य रचित, स्तोत्र पाठ का अर्चन है। सबसे पहले निज हृदय महल में, आह्वानन स्थापन है।।१।। दोहा निज आतम का ध्यान कर, किया स्व पर…
अरिहन्त परमेष्ठी पूजा स्थापना गीताछन्द अरिहंत प्रभु ने घातिया को, घात निज सुख पा लिया। छ्यालीस गुण के नाथ अठरह, दोष का सब क्षय किया।। शत इन्द्र नित पूजें उन्हें, गणधर मुनी वंदन करें। हम भी प्रभो! तुम अर्चना, के हेतु अभिनंदन करें।।१।। ॐ ह्रीं णमो अरिहंताणं श्री अरिहंतपरमेष्ठि समूह! अत्र…
भगवान श्री नमिनाथ जिनपूजा -अथ स्थापना-गीता छंद- नमिनाथ के गुणगान से, भविजन भवोदधि से तिरें। मुनिगण तपोनिधि भी हृदय में, आपकी भक्ती धरें।। हम भी करें आह्वान प्रभु का, भक्ति श्रद्धा से यहाँ। सम्यक्त्व निधि मिल जाय स्वामिन्! एक ही वांछा यहाँ।।१।। ॐ ह्रीं श्रीनमिनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।…
नंदीश्वर द्वीप पूजा [अष्टान्हिका व्रत एवम नंदीश्वर पंक्ति व्रत में] अथ स्थापना (गीता छंद) सिद्धांत सिद्ध अनादि अनिधन, द्वीप नंदीश्वर कहा। मुनि वंद्य सुरनर पूज्य अष्टम-द्वीप अतिशययुत महा।। वहाँ पर चतुर्दिक शाश्वते, बावन जिनालय शोभते।…
आचार्य श्रीवीरसागर महाराज की पूजन स्थापना (नरेन्द्र छन्द) महावीर पथ के अनुयायी, वीरसिन्धु आचार्यप्रवर। शान्ति सिन्धु के प्रथम शिष्य, आर्यिका ज्ञानमति के गुरुवर।।…
तेरहद्वीप जिनालय पूजा (मध्यलोक जिनालय पूजा) अथ स्थापना (शंभु छंद) श्री स्वयंसिद्ध जिनमंदिर यहाँ पर, चार शतक अट्ठावन हैं। मणिमय अकृत्रिम जिनप्रतिमा, ऋषि मुनिगण के मनभावन हैं।। सौ इंद्रों से वंदित जिनगृह, मैं इनकी पूजा नित्य करूँ। आह्वानन संस्थापन करके, निज के सन्निध नित्य करूँ।।१।। ॐ ह्रीं मध्यलोकसंबंधिपंचमेर्वादिचतु:शतअष्टपंचाशत्जिनालयजिन-बिम्बसमूह! अत्र अवतर…
दशलक्षण पूजा (गणिनी प्रमुख श्री आर्यिका ज्ञानमती माता जी स्थापना (शंभु छंद) तीर्थंकर मुख से प्रगटे ये, दशलक्षण धर्म सौख्यकारी। ये मुक्तिमहल की सीढ़ी हैं, सब जन मन को आनंदकारी।। वर क्षमा-मार्दव-आर्जव-सत्य-शौच-संयम-तप-त्याग तथा। आिंकचन ब्रह्मचर्य उत्तम इन पूजत मिटती सर्व व्यथा।।१।। दोहा उत्तम दशविध धर्म ये, धरें सूर्य सम तेज। आह्वानन…