दशलक्षणधर्म पूजा, व्रत विधि
दशलक्षणधर्म पूजा (कविवर द्यानतरायजी कृत) -अडिल्ल- उत्तम छिमा मारदव आरजव भाव हैं। सत्य शौच संयम तप त्याग उपाव हैं।। आकिंचन ब्रह्मचर्य धरम दश सार हैं। चहुँगति-दुखतैं काढ़ि मुकति करतार हैं।। ॐ ह्रीं उत्तमक्षमादि-दशलक्षणधर्म! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं। ॐ ह्रीं उत्तमक्षमादि-दशलक्षणधर्म! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं। ॐ ह्रीं उत्तमक्षमादि-दशलक्षणधर्म!…