लिंग व्यभिचार!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिंग व्यभिचार – स्त्रीलिग के स्थान पर पुल्लिंग का कथन करना और पुल्लिंग के स्थान पर स्त्रीलिेग का कथन करना। Limga Vyabhicara-wrong interpretation of genders (i. e. masculine for feminine or vice versa)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिंग व्यभिचार – स्त्रीलिग के स्थान पर पुल्लिंग का कथन करना और पुल्लिंग के स्थान पर स्त्रीलिेग का कथन करना। Limga Vyabhicara-wrong interpretation of genders (i. e. masculine for feminine or vice versa)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शालिसिक्थ मत्स्य – Shalisiktha Matsya. A special type of aquatic being (Tandul Matsya). तन्दुल मत्स्य; इनका शरीर तण्डुल (चावल) के सिक्थ के प्रमाण होता है एवं स्वयंभूरमण समुद्र में रहने वाले महामत्स्य के कां का मेल खाकर जीवन निर्वाह करते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय प्रत्याख्यान – Nishchaya Pratyaakhyaana. Absolute renunciation (to have real knowledge). मुनि अवस्था में अपने से भिन्न पदार्थों को पर जान उन्हें उसी समय छोड़ देना ” अतः वास्तव में ज्ञान ही प्रत्याख्यान है ऐसा निश्चय कर आत्मा में स्थिर हो जाना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लौकिक शुची –Laukika Shuchi.: Eight particular means of worldly purities. लोक व्यवहार शुद्धि –काल ,अग्रि,भस्म ,मृत्तिका ,गोबर ,पानी ,ज्ञान और निर्विचिकित्सा-ग्लानिरहितपना ये 8 प्रकार की वस्तुओं से व्यवहार में शुद्धि की जाती है “जैसे मिट्टी से हाथ धोना ,गोबर से जमीन लीप कर शुद्ध करना आदि “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्तर सत्त्व त्रिभंगी –VistaraSattvaTribhammgi. Name of a treatise written by AcharyaKanaknandi. आचार्य कनकनंदि कृत कर्म सिध्दांत विषयक प्राक्रत भाषा का एक ग्रंथ ” समय – ई.सन् ९३९
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रसाधिकाम्मोद – रसधिक जाति के मेघ। यं रस की वर्शा करते हैं।उत्सर्पिणी काल में अतिदुशमा काल के अन्त में ये बरसते है जिससे घरती उपजाउ होती है। Rasadhikammoda-A kind of clouds causing juicy raining
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शांतिनाथ पुराण – Shantinaatha Puraana. Many narrative books of this title written by 1)Poet Asag 2) Acharya Shreedhar 3) sakalkirti 4) Shubhkirti. कवि असग द्वारा (ई. 988) रचित हिंदी महाकाव्य, आचार्य श्रीधर (ई. 1132) कृत अपभ्रंश काव्य, सकलकीर्ति (ई. 1406-1442) कृत 3475 संस्कृत पद्य प्रमाण ग्रंथ, शुभकीर्ति (ई.श. 15 पूर्वार्ध) कृत अपभ्रंश काव्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय अहिंसा – Nishchaya Ahinsa. Absolute non-voilence. मुनि अवस्था में प्रमाद व राग आदि का उत्पन्न न होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपसत्य – 10 प्रकार के सत्यभाशण में एक। इसमें पदार्थ के न हाने पर रूप मात्र की अपेक्षा उसका कथन करना।जैसे – चित्र में बने पुरूश को पुरूश कहना। Rupasatya-Description of something by general outline