द्वैपायन!
द्वैपायन See – Dvîpåyana. देखें – द्वीपायन। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वीद्रिय जीव That which has two senses. जिन जीवों के स्पर्शन – रसना दो इन्द्रियां होती है, शंख कृमि आदि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेयांससागर – Shreyaansasaagara. Name of a great Acharya in the disciple tradition of Acharya Shree Shantisagarji Maharaj. 20वीं सदी के प्रथम आचार्य चारित्रचक्रवर्ती श्री शान्तिसागर जी महाराज की परम्परा में हुए पंचम पट्टाचार्य ” इनकी प्रेरणा से मांगीतुंगी सिद्धक्षेत्र पर 24 तीर्थंकर प्रतिमाओं का नूतन जिनमंदिर निर्मित किया गया है ” ये एक महान…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतवीर – Shrutaveera. Name of a Bhattarak of Sen group. सेनसंघ या वृषभ संघ की पट्टावलि के एक भट्टारक “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीष – Shreesa. The initiation & omniscience tree of Lord Suparshvanaath. तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ का दीक्षा एवं केवलज्ञान वृक्ष ” अपरनाम शिरीष वृक्ष “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंदी -उत्साहवर्द्धक मंगल पाठ करने वाले चारण अथवा देव। ये तीर्थकर माता को जगाने व प्रस्थान के समय उच्च स्वर से मंगल पाठ करते है। Bandi- serving deities or beings.
उदयसेन मुनि Name of a Jaina-saint. एक दिगम्बर मुनि पं. आशाधर के शिष्य।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्च्छा–Muurchchha. Unconsciousness, Delusion, Attachment, Worldly, Worldly involvement. बेहोशी, मोह, जैनागमानुसार ‘मूर्च्छा’ परिग्रह या ममत्व भाव है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्यप्रवाद – Satyapravaada. A part of early canons ( the 6th part of Purvagat Shrut) containing description of 12 type of languages & 10 types of speeches. पूर्वगत श्रुत का छठवां भेद ” इसमें 1 करोड़ पद है, जिसमे 12 प्रकार की भाषाएँ तथा 10 प्रकार के वचनों का कथन किया गया है “