छंदशतक!
छंदशतक A book written by a poet Vrindavan. कवि वृन्दावन द्वारा रचित (ई. १८००-१८४८) भाषा पद संग्रह ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
छंदशतक A book written by a poet Vrindavan. कवि वृन्दावन द्वारा रचित (ई. १८००-१८४८) भाषा पद संग्रह ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समुत्कीर्तना – Samutkeertanaa. A disquisition door (Anuyodvar) expressing existence of all karmic nature. एक अनुयोगद्वार इसमे कर्म प्रकृतियो का अस्तित्व बतलाया जाता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवप्रत्ययिक – Bhavapratyayika. Inherent clairvoyance – a type of clairvoyance (Avadhigyan). अवधिज्ञान के दो भेदों में प्रथम भेद; इसके होने में मुख्य रूप से भव निमित्त होता है , देव – नारकी जीवों को यह ज्ञान जन्म से ही होता है “
चिंतानिरोध Concentration, Meditation. एकाग्रता ; चित्त की वृत्ति को एक ही विषय में लगान्मा चिंतानिरोध अर्थात् ध्यान है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लघिना ऋद्धि – विक्रिया ऋशि का एक भेद, जिस ऋशि के प्रभाव से साधु अपने षरीर को वायु से भी हल्का बनाने मेे समर्थ थे। Laghima Rdhhi-A type of super natural power pertaining to turning body lighter than air
चंद्रवंश The name of Som dynasty. सोमवंश; बाहुबली के पुत्र सोमयश न एईस वंश की स्थापना की थी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिविधान व्रत – तीन वर्श तक हरे भादों माघ व चैत्र मास में कृ अमावस को एकासन 1 से तीन को तेला तथा 4 को एकासन करना एवं षीलव्रत पालते हुए ऊँ हीं महावीराय नम की त्रिकाल जाप करना। Labdhividhana Vrata-A particular type of fasting or vow
चैतन्यप्राणरक्षा Absolute non-violence; protection of consciousness with the lack of passionate thoughts. निश्र्चय अहिंसा; रागादि का अभाव क्योंकि यह शुद्ध चैतन्य प्राण की रक्षा का कारण है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विर्यान्तराय कर्म –Viryamtaraya Karma. An obstructive Karma obscuring the vitality of beings of soul. जिस कर्म के उदय से आत्म वीर्य की रुकावट हो या जीव किसी कार्य के प्रति उत्साहित होने की इच्छा होते हुए भी उत्साहित नहीं हो पाता एवं असमर्थता का अनुभव करता हैं “
चारित्र औपशमिक Conduct causing lack of passions, lusts, desires etc. चारित्रमोहनीय के उपशम से जो वीतराग भावरूप चारित्र हो ।।[[श्रेणी:शब्दकोष]]