वज्रकांड!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रकांड – Vajrakaand : Name of the bow of Bharat Chakravarti (an emperor). भरत चक्रवर्ती के धनुष का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रकांड – Vajrakaand : Name of the bow of Bharat Chakravarti (an emperor). भरत चक्रवर्ती के धनुष का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेत्रोन्मीलन विधि – Netronmeelana Vidhi. A particular kind of ritual procedure of opening the eyes of the idol of Lord Jinendra with the golden-stick especially to be observed in Panchkalyanak Pratishtha on the day of attainment of Kevalgyan (ommiscience). पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में झंडारोहण-अंकुरारोपण के समय सर्वण्ह यक्ष की प्रतिमा के नेत्रों को मंत्रपूर्वक स्वर्ण…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिविका – Shivikaa. A palanquin. पालकी; जो मनुष्यों के द्वारा उठाकर ले जायी जाती वह शिविका कहलाती है, तीर्थंकरों के दीक्षावन जाने के लिए देवों द्वारा स्वर्ग से पालकी लायी जाती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीलोत्पला – Neelotpalaa. Name of a beloved female deity of indras. उत्तरेन्द्रों की एक प्रधान वल्लभिका “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूपाल चतुर्विशतिका टीका – Bhupala chaturvishtika Tika. Name a commentary book written by pandit Ashadhar. पं. आशाधर (ई. ११७३-१२४३) कृत संस्क्रत टीका “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीचोपपाद देव – Neechopapaada. A type of peripatetic celestials. एक प्रकार की व्यंतरजातीय देव “
इक्षुरस Juice of sugar cane. गन्ने का रस Sugar-cane juice. गन्ने का रस जिससे शक्कर गुड आदि बनते है। इस युग के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने एक वर्ष उन्तालीस दिन के उपवास के पश्चात हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस द्वारा इक्षुरस का प्रथम आहार ग्रहण किया था। Seventh island and ocean of middle universe. मध्यलोक…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निसृष्टार्थ – Nisrishtaartha. Best message conveyor. संदेशवाहक सर्वश्रेष्ठ दूत, कार्य में सफलता प्राप्त करना इसका उद्देश्य रहता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रज – धूल, ज्ञानावरण, दर्षनावरण, कर्म धूलि की तरह वस्तुओ का बोध और अनुभव में प्रतिबंध होने से रज कहलाते है। Raja-sand, Dust, Knowledge obscuring Karmas are also called as dust
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन प्रयोग कर्म – Vachan Prayoga karma.: A type of Prayoga karma (Pertaining to speech). प्रयोग कर्म के 3 भेदों में एक – जो संसार अवस्था में स्थित जीवों के और सयोग केवलियों के होता हैं “