गति परिष्पंद!
गति परिष्पंद Vibrational motion. बाह्य अभ्यंतर निमित्त के वश उत्पन्न होने वाला काय का परिस्पंद ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गति परिष्पंद Vibrational motion. बाह्य अभ्यंतर निमित्त के वश उत्पन्न होने वाला काय का परिस्पंद ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वामन मुनि –Vaamana Muni.: Name of a writer of ‘Memandra Puran’(a treatise). मेमंदर पुराण के रचयिता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्यप्रकृति – Punyaprakrti. Meritorious Karmic nature (are 68 in Jaina philosophy). कर्मों की ६८ प्रकृतियाँ पुण्यरूप हैं, साता वेदनीय, नरकायु के बिना तीन आयु, उच्चगोत्र, मनुष्यदिक्, देवदिक्, पाँच शरीर आदि “
गणनाथ भक्ति Adoring of Acharya saints. आचार्य भक्ति, सोलह कारण भावनाओं में एक भावना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विष्णुनंदि –Visnunandi. Name of an omniscient after Lord Mahavira. भगवान महावीर के बाद हुए पंचम श्रुतकेवली, समय – ई. पू. ४६५-४५१, अपरनाम नंदि था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंजिका – Panjikaa. A descriptive book of odd items. वृत्तिसूत्रों के विषम पदों को स्पष्ट करने वाले विवरण को पंजिका कहते हैं “
उद्योतन Fair conception (free from any doubt, desire etc.). शंका कांक्षा आदि दोषों को दूर करना इसको सम्यक्त्वाराधना कहते है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैरत्याग –Vairatyaga. Renunciation of mutual hostility (absence of hostility among beings is an excellence of Lord Arihant) अरहंत भगवन का देवकृत एक अतिशय, जीव पूर्व वैर को छोड़कर आपस में मैत्री भाव से रहने लगते हैं “
गगनखंड Part of sky. नभ या आकाश खंड; जहाँ ज्योतिष देव अपनी-अपनी परिधियों में पंक्तिरूप से संचार करते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]