रामपुराण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रामपुराण – एक कन्नड कवि पùनाथ द्वारा रचित गं्रथ। समय ई 1580। Ramapurana-Name of a treatise
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रामपुराण – एक कन्नड कवि पùनाथ द्वारा रचित गं्रथ। समय ई 1580। Ramapurana-Name of a treatise
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण स्वार्थ- अनुमान प्रमाण के भेद; परोपदेष के बिना जो ज्ञान होता है, वह स्वार्थ प्रमाण है। PramanaSvartha- Knowledge gained by self
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण निर्णय- न्याय विशयक एक ग्रंथ का नाम। PramanaNirnaya- Name of a book
त्रिलोकमंडन Name of an elephant. एक हाथी, रावण ने इसको मदमस्त अवस्था में पकडकर त्रिलोकमंडन नाम रखा था। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमत्त विरत- छठा गुणस्थान, प्रत्याख्यानावरण कशाय के क्षयोपषम से सकल संयम रुप मुनिव्रत होने के पश्चात् संज्वलन कशाय और नोकशाय के उदय से संयम में मल उत्पन्न करने वाले प्रमाद से सहित दिगम्बर मुनियों के प्रमŸविरत गुणस्थान होता है। PramattaVirata- The 6th stage of spiritual development where saints having perfect vows with passion
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यशोबाहु – आदिनाथ भगवान के 84 गणधरो में एक गणधर का नाम, आचार्य यषोभद्र के षिश्य, इनका अपरनाम आचार्य भद्रबाहु द्वितीय था। यं 8 अंगधारी थे तथा लोहाचार्य – 2 के गुरू थे। समय – वी नि 515 – 565 Yasobahu-Name of a chief disciple of lord Adinath, Also the name of the disciple…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रानीक – Sahasraaneeka. One of the sons of Vidyadhar-Vinami. विनमि विद्याधर के अनेक पुत्रों में एक पुत्र ।
देहदेवालय Body as a temple; Place of Lord in the inner part of one’s body. निज परमात्मा का इस नश्वर शरीर रूपी देवालय में स्थान।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यज्ञदत्त–Yagyadatta. Name of the 48th& the 51st chief disciples of Lord Rishabhadev. तीर्थंकर वृषभदेव के क्रमशः 48वे एवं 51वेगणधरो का नाम”