प्रशस्त ध्यान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशस्त ध्यान- प्रषंसनीय ध्यान। धर्मध्यान, शुक्लध्यान जो मोक्ष के कारण है। Prasasta Dhyana- Commendable meditation
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशस्त ध्यान- प्रषंसनीय ध्यान। धर्मध्यान, शुक्लध्यान जो मोक्ष के कारण है। Prasasta Dhyana- Commendable meditation
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्यसिद्ध – Bhavyasiddha. The soul worthy of getting bodiless salvation. जो जीव सिद्ध पद की प्राप्ति के योग्य हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शिष्य : == पितरमिव गुरुमुपचरेत्। —नीतिवाक्यामृत : ११-३४ शिष्य गुरु के साथ पिता के समान व्यवहार करे। प्रज्ञयातिशयानो न गुरुमवज्ञायेत। —नीतिवाक्यामृत : ११-२० अधिक प्रज्ञावान होने पर भी शिष्य गुरु की अवज्ञा न करे। संदिहानो गुरुमकोपयन्ननापृच्छेत्। —नीतिवाक्यामृत : ११-१५ संदेह होने पर शिष्य इस प्रकार से पूछे कि…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवाह क्रम- धारावाहिक; प्रतिसमय होने वाले द्रव्यों के उत्पाद व्यय। Pravaha Krama- Sequential flow
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भम्भा – Bhambha. Name of an auspicious musical instrument. राम के समय का एक मंगल वाघ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यक्षाभास- pratyaksabhasa Fallacious direct perception प्रत्यक्ष ज्ञान को अविषद स्वीकार करना।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूत शरीर – Bhuta Sharir. See- Bhuta gyanaka Sharir. देखें – भूत ज्ञायक शरीर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिंद्र – pratimdra Title for the secondary indras मुख्य इन्द्र के पश्चात् द्वितीय श्रेणी के इन्द्र।
एक – अंशग्राही ज्ञान Partial perceptual knowledge. प्रमाण के द्वारा ग्रहण की गई वस्तु के वस्तु के एक अंश में वस्तु का निश्चय करने वाला ज्ञान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]