दर्शन – ज्ञान-चारित्र!
दर्शन – ज्ञान-चारित्र Three jewels of Jainas (Right faith, Right knowledge & Right conduct ). रत्नत्रय सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यग्चारित्र इन तीनों गुणों को रत्नत्रय कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दर्शन – ज्ञान-चारित्र Three jewels of Jainas (Right faith, Right knowledge & Right conduct ). रत्नत्रय सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यग्चारित्र इन तीनों गुणों को रत्नत्रय कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवसेन An Acharya, disciple of Veersen (Dhavalåkar).आचार्य ई. 820-870 मं वीरसेन (धवलाकार) के शिष्य महाधवल सिद्धांत 40,000 श्लोक के कर्ता। [[श्रेणी: शब्दकोष ]] या Father’s name of the 5th Teerthankar (Jaina-Lord) of Videh kshetra (region). विदेह क्षेत्र में स्थित 5 वें तीर्थंकर के पिता का नाम। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चंद्रानन A Tirthankar (Jaina-Lord) of Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र के विद्यमान २० तीर्थंकर में एक तीर्थंकर का नाम ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मद – Mada. Proud, Pride, Arrogance, Hautiness. घमंड , यहज्ञान , कुल , रूप आदि 8 भेदों वाला होता है “
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == कुशिष्य : == देंतोच्चिय उवएसं हवइ कयत्थो गुरु सुसीसाणं। विवरीयाण निरत्थो दिणयरतेओ व्व उलुयाणं।। —पउमचरिउ : ५०५ सुशिष्यों को उपदेश देने पर गुरु कृतार्थ होता है, किन्तु जिस तरह उल्लू के लिए सूर्य निरर्थक होता है, उसी तरह विपरीत अर्थात् कुशिष्यों को उपदेश देने पर वह निरर्थक हो जाता है।…
चंद्रप्रभु Name of the 8th Tirthankar (Jaina-Lord). ८वें तीर्थंकर ; इनका जन्म चन्द्रपूरी के इक्ष्वाकुवंशी राजा माहासें एवं रानी लक्षमणा के यहाँ हुआ था. इनकी १० लाख पूर्व की आयु एवं १५० धनुष (छह सौ हाथ) शरीर की ऊंचाई थी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मणिपुर चक्र – Manipura Chakra. Circular position of navel to be used for the installation of Mantras in meditation. नाभिचक्र; इसके ऊपर मन्त्रों को स्थापित कर ध्यान किया जाता हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नंदिसंघ – Namdisamgha A group of Digambara jain Saints. दिगम्बर जैन साधुओं का एक संघ ”
गृहस्थापित दोष A fault of hermitage. वसतिका का एक दोष; गृहस्थ द्वारा स्वयं के किए बनवाया गृह, साधु आश्रय के नाम करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]