राजसेना!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजसेना – राजा की सेना इसकी 18 श्रेणिया होती है। Rajasena- The army of a king
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजसेना – राजा की सेना इसकी 18 श्रेणिया होती है। Rajasena- The army of a king
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेद :Difference, type, division, separation, discrimination, disjunction. विरुध धर्मों एवं भित्र-भित्र कारणों काहोना यही भेद है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजसूय – चक्रवर्ती सागर के समय मे प्रचलित राजाओं के द्धारा किया जाने वाला एक अनार्थ यज्ञ। महाकाल असुर के द्वारा हिंसा की प्रेरणा देने के लिए ये चलाया गया था। Rajasuya-Name of a violenceful yagya (sacrificial fire) prevalent at the time of Chakravarti sagar
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सम्यक् चारित्र : == सम्यक्त्वरत्नभ्रष्टा, जानन्तो बहुविधानि शास्त्राणि। आराधनाविरहिता, भ्रमन्ति तत्रैव तत्रैव।। —समणसुत्त : २४९ किन्तु सम्यक्त्व रूपी रत्न से शून्य अनेक प्रकार के शास्त्रों के ज्ञाता व्यक्ति भी आराधनाविहीन होने से संसार में अर्थात् नरकादि गतियों में भ्रमण करते रहते हैं। श्रुतज्ञानेऽपि जीवो, वर्तमान: स न प्राप्नोति…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध्यप्र्याप्तक – अपर्याप्तक नाम कर्म के उदय से जो जीव अपने योग्य पर्याप्तियों को पूर्ण किए बिना ही ष्वास के 18 वें भाग में मरण को प्राप्त हो जाता है अर्थात जिसके एक भी पर्याप्ति पूर्ण नही होती उसे लब्ध्यप्र्याप्तक कहते हैैं। Labdhyaparyaptaka-Absolutely, non development beings (Having very short life)
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भिक्षु प्रतिमा – Bhikshu Pratima. Particular 12 stages of renunciation for holy death of Jaina saints. सल्लेखना की साधना हेतु जैन साधुओं के लिए आहार त्याग आदि से संबंधित १२ प्रतिमाएं होती हैं, इनका विशेष वर्णन भगवती आराधना में देखें “
उद्धारदेव Name of the 10th Tirthankar (Jaina-Lord) of past time. भूतकालीन चैबीसी के आठवें तीर्थंकर (उद्धारनाथ)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रस़ऋद्धि – एक ऋद्धि, यह उग्र तपस्या से प्राप्त होती है। Rasa Rddhi- A type of super natural power