भाववचन!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाववचन – Bhavavachan. Volitional speech. वचन; जो वीर्यान्तराय और मतिज्ञानावरण तथा श्रुतज्ञानावरण कर्मों के क्षयोपशम और अंगोपांग नामकर्म के निमित्त से होता है ” यह पौद्गलिक होता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाववचन – Bhavavachan. Volitional speech. वचन; जो वीर्यान्तराय और मतिज्ञानावरण तथा श्रुतज्ञानावरण कर्मों के क्षयोपशम और अंगोपांग नामकर्म के निमित्त से होता है ” यह पौद्गलिक होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीदत्त – Shreedatta. Name of a great Acharya of the basic lineage of Lord Mahavira, Name of another Acharya-the writer of ‘Jalp Nirnay Granth’. भगवान महावीर की मूल परम्परा में लोहाचार्य के बाद हुए एक अंगधारी आचार्य (समय ई. 38-58)” एक प्रसिद्ध तार्किक दिगम्बराचार्य, जल्प निर्णय ग्रन्थ के रचयिता (समय-ई. श. 4 का उतरार्ध)…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संविद् – Sanvid. Knowledge obtained by right method, the perceptive knowledge. जिससे यथार्थ रीति से वस्तु का ज्ञान हो उस ज्ञान को संविद् कहते हैं “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमलीक–Yamaliik. Name of an omniscient personality in the assembly of Lord Mahavira. भगवान् महावीर के तीर्थ में हुए एक अन्कृत केवली”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रावक सूत्र – Shraavaka Sootra. A sacred thread possesed by lay followers. यज्ञोपवीत; यह तीन धागे का होता है जो रत्नत्रय का प्रतीक होता है ” अष्टमूलगुणधारी श्रावकों के द्वारा यह विवाह के बाद छह धागों का धारण किया जाता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्तामर कथा – Bhaktamara Katha. Name of tales written by Pandit Raymallaji and Jaichand Chhabda. पं. रायमल्ल (ई. १६१०) एंव पं. जयचन्द छाबड़ा (ई. १८१३) द्वारा रचित कथा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रमण – Shramana. The Jaina Saints involved in austerities. निर्ग्रन्थ मुनि ” तपश्चर्यारूप श्रम के कारण मुनिराज को श्रमण कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Supreme soul. संसारी जीवो मे से जो उत्कृष्ट आत्मा बन जाती है उसे परात्मा कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] म्रदु भाषण–Mradu Bhashan. Soft and sweet speech. मधुर एवं विनम्र वचन या उपदेश, भाषा समिति; प्रिय, मधुर या हितकारी वचनों का प्रयोग करना”