तत्वार्थभावना!
तत्वार्थभावना Thinking of ascertained reals. ध्यानशुद्धि की हेतु भूत ज्ञानशुद्धि में सहायक चिंतन[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वार्थभावना Thinking of ascertained reals. ध्यानशुद्धि की हेतु भूत ज्ञानशुद्धि में सहायक चिंतन[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म साम्पराय चारित्र – Sukshma Saamparaaya Chaaritra. Conduct with minute passions (Sukshma Saamparaaya reg. purity of soul). दसवें गुणस्थान में होने वाला चारित्र इस चारित्र में कषाय अति सूक्ष्म हो जाती है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पितृकायिक – Pitrkayika. A type of deities. आकाशोपपन्न देवों के १२ भेदों में एक भेद “
तत्वशक्ति Power of nature of an element. वस्तु के स्वभाव को तत्व कहते हैं वही तत्व शक्ति भी कहलाती है। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म ऋजुसूत्र नय – Suksama Rijusutra Naya. A standpoint related to the minute acceptance of something. ऋजुसूत्र नय के दो भेदों में एक भेद । जो नय एक समयवर्ती सूक्ष्म अर्थ प्रर्याय (अवस्थायी पर्याय) को ग्रहण करें ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्यानंद (आचार्य) – Vidyannada (Acharya). 1) Name of a great Acharya, the writer of great treatises (Ashtasahasri etc.). 2) Name of a saint, the disciple of Acharya Shri Deshbhushan Maharaj . 1) अष्टसहस्त्री, आप्त परीक्षा, श्लोकवार्तिक, प्रमाण मीमांसा आदि अनेक ग्रन्थों के कर्ता एक आचार्य ” समय – ई. स. ७७५ –…
चन्द्रप्रभा Name of a palanquin used for Lord Mahavira, while going for initiation. भगवान मज\हावीर दीक्षावन के लिए इस नाम की पालकी पर बैठकर गए थे ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुषमा काल – Sushamaa Kaala. Pleasant period of woridily cycle ( the 2nd of Avasarpini Kal & the 5th of Utsarpini Kal According to Jaina Philosoph) अवसर्पिणी के द्वितीय काल और उत्सर्पिणी के पंचम काल का नाम । इसमें मध्यम भाग भूमि रहती हैं एवं इसका समय 3 कोड़ाकोड़ी सागर का है। इस काल…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पावागिरि (तीर्थ) – Pavagiri (Tirtha). Name of a Jain place of pilgrimage near Una (dist. Khargon, M.P.). It is the salvation- place of Svarnabhadra etc. 4 Munis (saints). मध्यप्रदेश के जिला खरगौन में ऊन नामक स्थान से दो फलांग दूर स्थित एक सिध्दक्षेत्र. यहाँ से स्वर्णभद्र आदि चार मुनि निर्वाण को प्राप्त हुए हैं….
गुरु स्पर्श नामकर्म जिस कर्म के उदय से शरीर भारी हो हो ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]