पुंडृ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुंडृ – Puindra. A type of sugarcane, Northem part of Bengal, A country of Bharat Kshetra in the east Aryakhand (region). एक प्रकार का गन्ना, वर्तमान बंगाल का उत्तर भाग, भरत क्षेत्र पूर्व आर्यखण्ड का एक देश “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुंडृ – Puindra. A type of sugarcane, Northem part of Bengal, A country of Bharat Kshetra in the east Aryakhand (region). एक प्रकार का गन्ना, वर्तमान बंगाल का उत्तर भाग, भरत क्षेत्र पूर्व आर्यखण्ड का एक देश “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्षा – देखभाल, सुरक्षा अहिंसा, मन वचन काय की क्रिया देखभाल कर, करना जिससे जीव घात न हो, पिषाच व्यंतरो का दूसरा भेद। Raksa-To protect all living beings, defence, non-violence, A type of peripatetic deity (Pishach)
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशुध्दता – Vishuddhata. Genuineness, Purity, Sacredness. पवित्र, निष्कलंकता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नवृष्टि – रत्नवर्शा तीर्थकरों के गर्भावस्था में आने के 6 महीने पहले से जन्म पर्यन्त 15 मास तक जो कुबेर माता के आंगन मे रत्नो की वर्शा करते है। Ratnavrsti-Divinely rain of jewels (an auspicious event pertaining to the birth of Jaina lord)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुक्र (स्वर्ग) – Shukra (Svarga). The 9th Kalp (heaven)among all 16. 16 कल्पों में 9वां कल्प या स्वर्ग ” यहाँ के देवों की उत्कृष्ट आयु 16 सागर है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भविष्याभाव संबंध – Bhavisyabhava Sambamdha. A type of relation pertaining to future. संबंध के अनेक भेड़ों में एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचाचार – Panchaachaara. Five kinds of special right conducts observed by Jaina Acharya. सम्यग्दर्शनाचार, ज्ञानाचार, चारित्राचार, तपाचार, और वीर्याचार ये पंचाचार कहे जाते हैं” जैन आचार्य इनका प्रमुखतासे पालन करते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगसार – आचार्य यागेन्दु देव द्वारा रचित 108 दोहा प्रमाण अपभ्रंष अध्यात्मिक ग्रंथ। Yogasara-Name of the treatise