गौणसेन!
गौणसेन A disciple of Acharya Siddhantsen. आचार्य सिद्धांतसेन के शिष्य ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गौणसेन A disciple of Acharya Siddhantsen. आचार्य सिद्धांतसेन के शिष्य ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सनातन – Sanaatana. A Sankhya thinker, immemorial or eternal. एक सांख्य विचारक, प्राचीन काल से चला आता हुआ क्रम।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्यधर्म – Satyadharma. One of the 10 particular religious observances- to speak truly. दशलक्षण धर्मों में एक धर्म ” जो मुनि दुसरे को क्लेश पहुंचाने वाले वचनों को छोड़कर अपने और दुसरे का हित करने वाले वचन कहता है उसके सत्यधर्म होता है ” अथवा सज्जन पुरुषों के साथ श्रेष्ठ वचन बोलना सत्य धर्म…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वित्तसार – Vittasaara.: Name of a treatise written in Apabhransh language. श्रावक एवं मुनि धर्म सम्बन्धी अपभ्रंश भाषा का ग्रन्थ (ई.श. 15) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सनत्कुमार देव – Sanatkumaara Deva. Name of the Indra of third heaven (Sanatkumar). तीसरे सनत्कुमार स्वर्ग के इन्द्र ये भगवान के जन्मकल्याणक मे माहेन्द्र इन्द्र के साथ चंवर ढुराते है।
जप Counting silently the beads of rosary with meditation (chanting mystic words). ध्यान करना या मन्त्रों का स्मरण करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विजयार्ध – Vijayaardha.: Name of a great mountain (in Jain philosophy). भरत और ऐरावत क्षेत्र के मध्य स्थित एक पर्वत,चक्रवर्ती के विजय-क्षेत्र की आधी सीमा इसी पर्वत से निर्धारित होती है,इसीलिए इसे विजयार्ध कहते है “इस पर विद्याधरों का निवास है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंगिनी: Name of a chief Aryika (Ganini) in the Samavasharan (assembly) of Lord Naminath. नमिनाथ भगवान के समव शरण की मुख्य आर्यिका का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धपर्यायार्थिक नय – Shuddhaparyaayaarthika Naya. A standpoint accepting the present form or mode of a substance. सूक्ष्म ऋजुसूत्र नय शुद्धि पर्यायार्थिक नय है, यह अर्थपर्याय को ग्रहण करता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सदगृहित्व क्रिया – Sadgrhitva Kriyaa. A type of auspicious activity, performing religious observances for spirituality. कत्र्रन्वयादि 7 क्रियाओ मे एक क्रिया। सज्जातिपरम स्थान को प्राप्त करने के पश्चात् सद्गृहस्थ रुप द्वितीय परम स्थान की प्राप्ति हेतु गृहस्थ का देव पूजा आदि छः कर्मों का करना, सत्य, शैच, शांति, दम आदि गुणांे से युक्त होना…