उभयोदयबंधी प्रकृति!
उभयोदयबंधी प्रकृति Numerous space points in bilateral extremes . जो कर्म प्रकृति अपना उदय होने अथवा न होने पर भी बंधती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उभयोदयबंधी प्रकृति Numerous space points in bilateral extremes . जो कर्म प्रकृति अपना उदय होने अथवा न होने पर भी बंधती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दर्शनविशुद्धि Purity of right faith. 16 कारण भावना में पहली भावना सम्यग्दर्शन को अत्यन्त निर्मल व दृढ़ हो जाना। इसके होने पर ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध संभव है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसंत – Vasanta. : Another name of Sumeru mountain. सुमेरुपर्वत का अपरनाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोगराहित्य – रोगरूपी बाधा का अभाव होना। अर्हत भगवान के देवकृत अतिषयों में एक अतिषय। समवषरण में सम्पूर्ण जीवों को रोग आदि की बाधाए नही होना। Rogarahitya-Devoid of disease, an excellence of lord Arihant
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्षलक्ष – Varshalaksha.: A time period of 1 lac years. काल का प्रमाण; वर्षशतसहस्त्र (एक लाख वर्ष ) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजवृत्ति – राजा का कार्य, पक्षपात हो कुल की मर्यादा, बुद्धि और अपनी रक्षा करते हुए न्याय पूर्वक प्रजा का पालन करना राजाओं की राजवृत्ति कहलाती है। Rajavrtti-Ruling duties of a king
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्तना – Vartanaa.: Continuous inperceptible minute changes in any matter. द्रव्य के प्रति समय होने वाले परिवर्तन अर्थात प्रत्येक द्रव्य प्रत्येक पर्यायमें प्रति समय जो स्वसत्ता की अनुभूति करता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचकल्याणक वंदना – Panchakalyaanaka Vandanaa. Devotional celebration of five auspicious events of the life of Tirthankars (Jaina Lord). कृतिकर्म; भगवान के गर्भ, जन्म आदि पांचों कल्याणक की सिद्ध आदि भक्ति पाठ के साथ वन्दना करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ममकार – Mamakara. My-ness , A feeling of mine with worldly objects. आत्मा से भिन्न पर पदार्थों में मेरेपन का भाव ममकार हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूर्यग्रहण – Suryagrahana. Solar eclips. जैन भूगोल के अनुसार सूर्य और पृथ्वी के बीच में केतु ग्रह का मिान आ जाने पर सूर्य का ढॅंक जाना सूर्यग्रहण कहलाता है। यह प्रत्येक छह महीने में अमावस्या के दिन होता है। सूर्यग्रहण के समय कोई शुभ कार्य नही किये जाते है।