विस्तार दर्शनार्य!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्तार दर्शनार्य –VistaraDarsanarya. A type of noble persons. दर्शनार्य १० प्रकार के होते हैं उनमें से विस्ताररूचि वाले सम्यग्द्रष्टि को विस्तार दर्शनार्य कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्तार दर्शनार्य –VistaraDarsanarya. A type of noble persons. दर्शनार्य १० प्रकार के होते हैं उनमें से विस्ताररूचि वाले सम्यग्द्रष्टि को विस्तार दर्शनार्य कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भानुमालिनी – Bhanumalini. Name of a super power possessed by Ravana. रावण को प्राप्त एक विधा “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == विरक्त : == भावे विरक्तो मनुजो विशोक:, एतया दु:खौघ—परम्परया। न लिप्यते भवमध्येऽपि सन् , जलेनेव पुष्करिणीपलाशम्।। —समणसुत्त : ८१ भाव से विरक्त मनुष्य शोक—मुक्त बन जाता है। जैसे कमलिनी का पत्र जल में लिप्त नहीं होता, वैसे ही वह संसार में रहकर भी अनेक दु:खों की परम्परा से…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धद्रव्यार्थपर्याय नैगमनय – Shuddha Dravyaarthaparyaaya Naigama Naya. A standpoint related to distinct & indistinct description of a pure matter (Jiva) & one of its Artha Paryay. शुद्धद्रव्य व उसकी किसी एक अर्थपर्याय को गौण-मुख्यरूपसे विषय करने वाला नय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुनर्जन्म – Punarjanma. Reincarnation, rebirth. पुनः या दुबारा जन्म होना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मोत्तर (स्वर्ग) – Brahmottara (Svarga ). The sixth heaven. छठा स्वर्ग; इस कल्प में एक लाख ४ हजार विमान हैं “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुक्तिशिला–Muktishila. Place of salvation. सिद्ध शिला; ईषत् प्राग्भार अष्टमपृथ्वी केमध्य छत्र के आकार ढाई द्वीप प्रमाण गोल 45 लाख योजन व्यास की शिला” यहीं सिद्ध भगवान् विराजते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गलमोक्ष – Pudgalamoksa. A salvation (separation of Karmas from soul). मोक्ष का एक भेद. द्रव्य मोक्ष; सम्पूर्ण कर्मों का आत्मा से अलग हो जाना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्रकलश – Bhadrakalasa. Name of the treasurer of Ram’. ८ वें बलदेव श्रीराम के कोषाध्यक्ष “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूलोत्तरप्रकृति–Mulottar Prakrati. Basic sub–karmic nature which are 148 in number. कर्मो की ज्ञानवरणादि 8मूलप्रकृति एवं इनके उत्तरभेद 148 मूलोत्तर प्रकृति कहलाती है”