रोगपरिशहजय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोगपरिशहजय – 22 परिशहो में एक परिशह, असाध्य पीडा को उसके प्रतिकार की कामना रहित होकर साधु द्वारा समतापूर्वक सहन करना। रोग परिशह जय कहलाता हैं। Rogaparisaha Jaya-To bear afflictions of disease
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोगपरिशहजय – 22 परिशहो में एक परिशह, असाध्य पीडा को उसके प्रतिकार की कामना रहित होकर साधु द्वारा समतापूर्वक सहन करना। रोग परिशह जय कहलाता हैं। Rogaparisaha Jaya-To bear afflictions of disease
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यशस्वती–Yashsvati. Mother’s name of the 1st Chakravarti ‘Bharat’ (an emperor). प्रथम चक्रवर्ती ‘भरत’ कीमाता का नाम”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंगुश्रीश्राविका – Pangushreeshraavikaa. Name of an female votary in the period of Kalki king. पंचम काल के अंत में कल्कीके समय चतुर्विध संघ में रहने वाली एक श्राविका का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध राशि – प्राप्त की गई राषि। Labdha rasi-Gained amount or quantity of something
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्रपाहुड़ – Sutrapaahuda. Name of a great early canon written by Acharya Kundkund. आचार्य कुन्दकुन्द (ई0 127-179)प्राकृत गाथाबद्ध ग्रन्थ । इस पर आचार्य श्रुतसागर (ई0 1473-1533) कृत संस्कृत टीका और पं0 जयचन्द्र छाबडा (ई0 1867) कृत भाषा वचनिका उपलब्ध है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंकजगंधा – Pankajagandhaa. Name of a chief female deity. एक महत्तरिकादेवी का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोमज वस्त्र – वस्त्र के पांच प्रकारो अंडज, वोडज, रोमज, वक्कज, चर्मज में एक प्रकार, उन से बने वस्त्र। Romaja (vastra)-Woolen clothes
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूच्यंगुल – Suchyangula. A large quantity as a unit of area measurement. क्षेत्रप्रमाण का एक भेद । अद्धापल्य के अर्द्धच्छेदों का विरलन कर प्रत्येक एक के ऊपर अद्धापल्य रखकर परस्पर गुणा करने से जो राशि उत्पन्न हो उसे सूच्यंगुल कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिलखन फल – Pilakhana Phala. A non-edible fruit. एक अभक्ष्य फल “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रेणुका – विदेह क्षेत्र में स्थित 13 वें तीर्थकर चन्द्रबाहु की माता का नाम। Renuka-Mother’s name of 13th Tirthanakar (Jaina lord) of videh kshtera (region)