वारुणी!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वारुणी –Vaarunii.: Name of a super power,Name of a city in the north of Vijayardh mountain. एक विद्या ,विजयार्ध पर्वत के उत्तरश्रेणी की एक नगरी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वारुणी –Vaarunii.: Name of a super power,Name of a city in the north of Vijayardh mountain. एक विद्या ,विजयार्ध पर्वत के उत्तरश्रेणी की एक नगरी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोगराहित्य – रोगरूपी बाधा का अभाव होना। अर्हत भगवान के देवकृत अतिषयों में एक अतिषय। समवषरण में सम्पूर्ण जीवों को रोग आदि की बाधाए नही होना। Rogarahitya-Devoid of disease, an excellence of lord Arihant
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध ध्यान – Shuddha Dhyaana. The supreme & absolute meditation. रागादि की सत्ता के क्षीण होने पर अंतरंग आत्मा के प्रसन्न होने से जो अपने अवारूप का अवलंबन है, वह शुद्ध ध्यान है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजवृत्ति – राजा का कार्य, पक्षपात हो कुल की मर्यादा, बुद्धि और अपनी रक्षा करते हुए न्याय पूर्वक प्रजा का पालन करना राजाओं की राजवृत्ति कहलाती है। Rajavrtti-Ruling duties of a king
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध उपलब्धि – Shuddha Upalabdhi. Attainment of pure spiritual knowledge. निश्चयरूप ज्ञान की प्राप्ति या अन्तरातमा का प्रत्यक्ष अनुभव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल स्कन्ध – Pudgala Skandha. Aggregate of molecules (a bind form). जिन परमाणुओं ने परस्पर बंध कर लिया है वे स्कन्ध कहलाते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ममकार – Mamakara. My-ness , A feeling of mine with worldly objects. आत्मा से भिन्न पर पदार्थों में मेरेपन का भाव ममकार हैं “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यश:नामकर्म प्रकृति–Yashah Naamkarm Prakrati. A type of Karmic nature causing fame or good name. जिस नामकर्म के उदय से जीव के पवित्र गुणों की ख्याति या प्रसिद्धि होती है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल अस्तिकाय – Pudgala Astikaya. One of the five Astikayas. पांच अस्तिकायों में एक; इसमें एक प्रदेश वाले अणु को भी प्रदेश प्रचय की शक्तिरूप स्वभाव के कारण अस्तिकाय कहा है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सम्यक् दर्शन : == सम्मद्दंसणलंभो वरं खु तेलोक्कलंभादो। —भगवती आराधना : ७४२ सम्यक् दर्शन की प्राप्ति तीन लोक के ऐश्वर्य से भी श्रेष्ठ है। यथार्थतत्त्व श्रद्धा सम्यक्त्वम्। —जैन सिद्धान्त दीपिका : ५-३ जीवादि तत्त्वों की यथार्थश्रद्धा (सम्यक्—विचार) करना सम्यक् दर्शन है। दर्शनभ्रष्टा: भ्रष्टा:, दर्शनभ्रष्टस्य नास्ति निर्वाणम्। सिध्यन्ति चरितभ्रष्टा:,…