दीर्घतपस्वी!
दीर्घतपस्वी One deeply involved in austerity. ऊंची (बड़ी) तपस्या करने वाला।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दीर्घतपस्वी One deeply involved in austerity. ऊंची (बड़ी) तपस्या करने वाला।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चन्दनछट्ठी कहा A book written by Pandit Lakhu. पंडित लाखू (ई.श. १३ का पूर्वपाद) द्वारा रचित कथा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्तेयानंद – Steyanamda. To feel pleasure in theft.रौद्रध्यान के 4 भेदो मे एक भेद, चैर्यानंद। प्रमादपूर्वक दूसरे के धन को बलात् हरने का अभिप्राय रखना या उसमे हर्षित होना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगत्याग क्रिया – गर्भान्वय की एक क्रिया।केवलीसमुद्धात करके मन वचन काय रूप योगो को अत्यन्त निरोध कर अत्यन्त निष्चल दषा को प्राप्त होना इसमंे मुनि विहार करना छोडकर यागो का निरोध करते है। Yogatyagakriya-An auspicious activity of renouncing vibration in the soul points (caused by mind Speech & body)
चर्मरत्न A jewel of Chakravarti (emperor) helps in walking through water without sinking. चक्रवर्ती का एक अचेतन रत्ना . जिसे जल पर बिच्छा देने से थलवत् गमन होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधान क्रिया – Samaadaana Kriyaa. A kind of passionful influx, to be restraintless or to violate the vows etc. साम्परायिक आस्त्रव की 25 क्रियाओ मे एक क्रिया; संयमी पुरुष का असंयम के अभिमुख होना। यह प्रमादवर्धक क्रिया होती है।
उदीर्ण That have passed from fruitional operation (regarding Karmic matter). फलदान रूप से परिणत हुआ कर्म -पुद्गल स्कन्ध।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चित्तवृत्ति State of mind, trend of thought, Inclination. मनःस्थिति ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समवाय संबंध – Samvaaya Sambamdha. Relation of inseparability. अयुत सिद्व (एक दूसरे के बिना न रहने वाले) आधार्य (पट) और आधार (तंतु) पदार्थों का इह प्रत्यय हेतु (इन तन्तुओ मे पट है) सम्बंध (वैषेषिक मान्य) समवाय सम्बंध है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिंग व्यभिचार – स्त्रीलिग के स्थान पर पुल्लिंग का कथन करना और पुल्लिंग के स्थान पर स्त्रीलिेग का कथन करना। Limga Vyabhicara-wrong interpretation of genders (i. e. masculine for feminine or vice versa)