शुभ वचन!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ वचन – Shubha Svapna. Auspicious dreams. वात, पितादि के प्रकोप से रहित सूर्य चंद्रमा आदि को देखना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ वचन – Shubha Svapna. Auspicious dreams. वात, पितादि के प्रकोप से रहित सूर्य चंद्रमा आदि को देखना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयसार कलश – Samayasaara Kalasha. Name of a specific composition by Acharya Amritchandra. आचार्य अमृतचन्द्र द्वारा समयसार की आत्मख्याति टीका मे प्रयुक्त किये गये विशेष छंद कलश नाम से कहे गये है। समय ई. 905-955।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभध्यान – Shubhadhyaana. Auspicious involvement. शुभद्ध्यान और शुक्लध्यान जो मोक्ष के कारण हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्तर सत्त्व त्रिभंगी –VistaraSattvaTribhammgi. Name of a treatise written by AcharyaKanaknandi. आचार्य कनकनंदि कृत कर्म सिध्दांत विषयक प्राक्रत भाषा का एक ग्रंथ ” समय – ई.सन् ९३९
चतुर्मुख यज्ञ A type of worship (performed by kings). देखें-चतुर्मुखमह।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयसत्य – Samayasatya. (Jiva, Ajiva, etc). जो वचन आगमगम्य प्रतिनियत 6 द्रव्य व उनकी पर्यायों की यथार्थता को प्रगट करने वाला है वह समयसत्य है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रसाधिकाम्मोद – रसधिक जाति के मेघ। यं रस की वर्शा करते हैं।उत्सर्पिणी काल में अतिदुशमा काल के अन्त में ये बरसते है जिससे घरती उपजाउ होती है। Rasadhikammoda-A kind of clouds causing juicy raining
चारित्रपाहुड़ A book written by Acharya Kundkund. आचार्य कुन्दकुन्द (ई. १२७-१२९) द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम पारीषद् – Madhyam paarishad. A type of council of deities. देवों के परिषद् (सभा) के तीन भेदों में एक भेद ; इसे चंदा नाम से जाना जाता है , इसमें बहुधा अन्तःपुर के महत्तर होतें है जो बेंतरूपीलता को हाथ में ग्रहण करके कंचुकी की पोषाक पहने हुए हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपसत्य – 10 प्रकार के सत्यभाशण में एक। इसमें पदार्थ के न हाने पर रूप मात्र की अपेक्षा उसका कथन करना।जैसे – चित्र में बने पुरूश को पुरूश कहना। Rupasatya-Description of something by general outline