भीमबल!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भीमबल – Bhimabala. The son of Dhratrashtra Gandhari. धृतराष्ट – गांधारी के दो पुत्रों में एक का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भीमबल – Bhimabala. The son of Dhratrashtra Gandhari. धृतराष्ट – गांधारी के दो पुत्रों में एक का नाम “
गुणानुराग Devotion towards virtues. गुणों एवं गुणवनों के प्रति भक्ति होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनयकर्म – Vinayakarma. Serving activity, to attend on, to look after. एक कृतिकर्म; सूश्रूषा करना “
खंड Part, Division, fragment, chapter, Section. भाग, हिस्सा, शास्त्र आदि का भाग, मकान का हिस्सा आदि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दश विकार Ten types of lustful sensual desires of human being. काम के वेग चिंता, स्त्री को देखने की इच्छा , दीर्घनिःश्वास, ज्वर, शरीर का दग्ध होना, भोजन न रूचना , मूर्छा की गोचरी आदि वृत्तियों का वर्णन किया गया है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनिभद्र–Munibhadra. Name of a Acharya. एक आचार्य (ई. सन1350–1390) जिनके शिष्य ने पर्मात्मप्रकाश ग्रंथ पर कन्नड़ टीका लिखी है”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धैर्यवान : == विसयजलं मोहकलं, विलास बिव्वो अजलयराइन्नं। मयमयरं उत्तिन्ना, तारुण्ण महन्नवं धीरा।। —इन्द्रियपराजयशतक : ४३ जिसमें विषयरूपी जल है, मोह की गर्जना है, स्त्रियों की विलासभरी चेष्टा रूप मत्स्य आदि जलचर जीव हैं और मद रूपी जिसमें मगरमच्छ रहते हैं ऐसे तारुण्य रूपी समुद्र को धीर पुरुषों…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोक्त्रत्व:Power of experiencing joy & sorrow. जीव की सुख-दुःख भोगने की शक्ति “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव – Bhava. World, Body form, Name of the predestined 6th Rudra. आयुनामकर्म के उदय से जीव की जो मनुष्यादि पर्याय होती है उसे भव कहते हैं, भविष्यकालीन छठे रूद्र का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिभा संस्कारारोपण पूजा – Pratibhaa sanskaaraaropana poojaa. A worshipping hymn composed by Acharya Indranandi. आचार्य इन्द्रनन्दि द्वारा रचित एक पूजा “