प्रवाल!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवाल- मूँगा, मानुशोत्तर पर्वत पर सिथत एक कूट। Pravala- Coral, Name of a summit situated at Manushottar mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवाल- मूँगा, मानुशोत्तर पर्वत पर सिथत एक कूट। Pravala- Coral, Name of a summit situated at Manushottar mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रज – धूल, ज्ञानावरण, दर्षनावरण, कर्म धूलि की तरह वस्तुओ का बोध और अनुभव में प्रतिबंध होने से रज कहलाते है। Raja-sand, Dust, Knowledge obscuring Karmas are also called as dust
गरूड़वाहिनी A type of divine power to fly over the sky. एक विद्या, इससे आकाश में गमन होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यक्ष हेतु- pratyaksa hetu Direct cause related to origination of knowledge उादिश्ट हेतु का एक भेद; अज्ञानादि का विनाषा, ज्ञज्ञन की उत्पति
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूद्रदत्त – भगवान ऋशभदेव के तीर्थ में एक ब्राहमण जो पूजा के लिए प्राप्त द्रव्य से जुआ खेलने के फलस्वरूम सातवें नरक में गया।चारूदत्त का व्यसनी चाचा, चारूदत्त को व्यसनी इसी ने बनाया था। Rudradatta-Name of a Brahmin in the era of lord Rishabhdev who went into 7th hell because of gambling, Name of…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विवक्षा – Vivaksha. Desire of orator or speaker. वक्ता की इच्छा को विवक्षा कहते हैं ” प्रशनकर्ता के प्रशन से ही प्रतिपादन करने वाले की विवक्षा होती हैं “
आठर्वी पृथ्वी The 8th earth (Siddhashila). सिद्धशिला ईषत्प्राग्भार-45 लाख योजन विस्तृत पृथ्वी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योनिमती तिर्यंचनी (तिरश्ची)- भाव स्त्रीवेद के उदय तिर्यच, तिर्यचनी, जिनका द्रव्यवेद पुरूश स्त्री या नपुंसक कोई भी हो सकता है। Yonimati Tiryarhcani (tirasci)-Those Tiryanch beings who are female according to Bhav ved but who might be male, female or hermaphrodite according to Dravya ved
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शल्य : == तत् शस्त्रं च विषं च, दुष्प्रयुक्तो वा करोति वैताल:। यन्त्रं वा दुष्प्रयुक्तं, सर्पो वा प्रमादिन: क्रुद्ध:।। यत् करोति—भावशल्य—मनुद्धृतमुत्तमार्थ—काले। दुर्लभबोधिकत्वम् , अनन्तसंसारिकत्वं च।। —समणसुत्त : ५७७-५७८ दुष्प्रयुक्त शस्त्र, विष, भूत तथा दुष्प्रयुक्त यन्त्र तथा क्रुद्ध सर्प आदि प्रमादी का उतना अनिष्ट नहीं करते, जितना अनिष्ट समाधिकाल…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वसहाय – Svasahaya. Absolutely independent. स्त्। जो स्वभाव से ही सिद्व है, इसलिये वह अनादि अनंत है स्वसहाय है, निर्विकल्प है।